आयुष के क्षेत्र में ऐतिहासिक मील का पत्थर: बेंगलुरु का CARI बना ISO 15189:2022 मान्यता प्राप्त करने वाला पहला संस्थान

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नई दिल्ली/बेंगलुरु | 11 अप्रैल, 2026

भारत के पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र के लिए आज का दिन एक बड़ी उपलब्धि लेकर आया है। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI), बेंगलुरु ने अपनी नैदानिक प्रयोगशाला के लिए प्रतिष्ठित ISO 15189:2022 अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त कर ली है। यह सम्मान हासिल करने वाला यह देश का पहला केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (CCRAS) संस्थान बन गया है।

यह वैश्विक मान्यता संस्थान की जैव रसायन (Biochemistry) और रुधिरविज्ञान (Hematology) प्रयोगशालाओं को प्रदान की गई है, जो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के सबसे कड़े गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरी हैं।

गुणवत्ता और विश्वसनीयता का नया मानक

माननीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ऐसी मान्यताएं यह सुनिश्चित करती हैं कि मरीजों को सटीक और सुरक्षित निदान सेवाएं मिलें। यह आयुष के बुनियादी ढांचे को वैश्विक विश्वसनीयता के एक नए स्तर पर ले जाने का प्रयास है।

इसी क्रम में आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने जोर देकर कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले आधुनिक निदान को पारंपरिक चिकित्सा के साथ जोड़ना, प्रमाण-आधारित आयुर्वेद (Evidence-based Ayurveda) के लिए एक निर्णायक कदम है।

आंकड़ों में छिपी सफलता की कहानी

पिछले पांच वर्षों में संस्थान ने अपनी क्षमताओं में जो विस्तार किया है, वह विस्मयकारी है। साल 2021 में जहां संस्थान की ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या लगभग 19,000 थी, वहीं 2026 तक यह बढ़कर 51,300 से अधिक हो गई है।

सबसे प्रभावशाली बदलाव प्रयोगशाला परीक्षणों में देखा गया है। वर्ष 2021 में किए जाने वाले महज 2,770 परीक्षणों के मुकाबले, वर्ष 2025-26 के दौरान संस्थान ने 1.55 लाख से अधिक परीक्षण किए हैं। वर्तमान में यह प्रयोगशाला रक्त शर्करा, थायरॉइड, लिपिड प्रोफाइल और गुर्दे की कार्यक्षमता सहित 50 से अधिक महत्वपूर्ण मापदंडों की जांच करने में पूरी तरह सक्षम है।

आधुनिक तकनीक और सुलभ सेवाएं

संस्थान की प्रमुख डॉ. सुलोचना भट और उनकी टीम के प्रयासों से अब यह केंद्र एक पूर्णतः स्वचालित (Fully Automated) उत्कृष्टता केंद्र में बदल चुका है। आधुनिक डिजिटल प्रणालियों के कारण अब मरीजों को अपनी जांच रिपोर्ट ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से तुरंत प्राप्त हो जाती है, जिससे उपचार की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हुई है।

भविष्य की योजनाएं

जुलाई 2024 में इनपेशेंट (IPD) सेवाओं की शुरुआत के बाद से संस्थान में बेड की उपलब्धता लगभग हमेशा पूरी रहती है, जो एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल की बढ़ती मांग का प्रमाण है। आगे बढ़ते हुए, CARI बेंगलुरु अपनी जांच क्षमताओं को और अधिक विस्तारित करने और ‘BIS IS/ISO 9001:2015’ प्रमाणन प्राप्त करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

यह उपलब्धि न केवल CARI बेंगलुरु के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है कि आयुर्वेद अब आधुनिक विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए तैयार है।

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Saket Singh
Saket Singhhttp://purepolitics.in
MBA in Media Management from Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication, Bhopal

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