भोपाल रेजिडेंशियल एरिया सीलिंग: 1000 से अधिक दुकानों को नोटिस, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नगर निगम का सख्त एक्शन
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रशासन का चाबुक पूरी तरह चल गया है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों का अनुपालन करते हुए भोपाल नगर निगम (BMC) ने भोपाल रेजिडेंशियल एरिया सीलिंग का बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। नगर निगम की इंफोर्समेंट टीमों ने अरेरा कॉलोनी (E-1 से E-5), बावड़िया कलां, 10 नंबर मार्केट और रोहित नगर जैसे पॉश इलाकों में कार्रवाई करते हुए 1,800 से अधिक कमर्शियल प्रतिष्ठानों को नोटिस थमाए हैं और दर्जनों दुकानों को सील कर दिया है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
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सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: तमिलनाडु से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के 8 मई के आदेश के तहत देश की सभी राज्य राजधानियों में रिहायशी क्षेत्रों से व्यावसायिक गतिविधियां बंद कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।
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4 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट डेडलाइन: राज्य सरकार व भोपाल नगर निगम को इस पूरी सीलिंग कार्रवाई की एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करनी है।
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1800 से अधिक प्रतिष्ठान निशाने पर: बीएमसी के चीफ सिटी प्लानर नीरज आनंद लिखार के अनुसार अरेरा कॉलोनी (169), बावड़िया कलां (260) और रोहित नगर (10) समेत शहर भर के 1,800 से ज्यादा व्यवसायियों को अल्टीमेटम दिया गया है।
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प्रॉपर्टी मालिकों के साथ किराएदार भी लपेटे में: भूमि विकास नियम 2012 के तहत इस बार सिर्फ भवन मालिकों को ही नहीं, बल्कि किराए पर दुकान चलाने वाले व्यापारियों को भी सीलिंग के नोटिस दिए गए हैं।
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व्यापारियों का विरोध व कानूनी दांवपेंच: कार्रवाई के विरोध में भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स लामबंद हो गया है, वहीं कई प्रभावित व्यापारियों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अंतरिम स्टे भी प्राप्त कर लिया है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और हाईकोर्ट की सख्ती
यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के क्रियान्वयन के रूप में की जा रही है, जिसमें आवासीय क्षेत्रों में कमर्शियल गतिविधियों के संचालन को कानूनन गलत ठहराया गया है। भोपाल में अरेरा कॉलोनी के निवासियों पूर्णेन्दु शुक्ला और पर्यावरणविद सुभाष सी. पांडे द्वारा दायर याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाया था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष तर्क दिया था कि रिहायशी प्लॉटों पर पब, रेस्टोरेंट, बैंक, क्लिनिक और शोरूम खुलने से यातायात जाम, सीवरेज ओवरफ्लो और ध्वनि प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं।
नगर निगम के सर्वे के अनुसार बीते चार सालों में रिहायशी इलाकों में अवैध दुकानें और व्यावसायिक गतिविधियां 3 गुना तक बढ़ गई हैं।
10 नंबर मार्केट में हंगामा और झूमाझटकी
सीलिंग की जमीनी कार्रवाई के दौरान अरेरा कॉलोनी के वार्ड-52 और 10 नंबर मार्केट में व्यापारियों ने भारी विरोध दर्ज कराया। वार्ड-52 में सीलिंग करने पहुंची बीएमसी टीम के साथ पूर्व पार्षद रामबाबू पाटीदार की तीखी बहस हुई, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें रातों-रात नोटिस थमाकर दुकानें बंद करने पर मजबूर कर दिया है।
बीएमसी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आगामी सीलिंग अभियानों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन से पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने का अनुरोध किया गया है।
व्यापारियों की मांग: ’21 सालों से नहीं आया मास्टर प्लान, लागू हो गुजरात मॉडल’
भोपाल के प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने इस कार्रवाई को एकतरफा और अनुचित करार दिया है। ‘फेडरेशन ऑफ ट्रेडर्स’ के अध्यक्ष आनंद सोनी और ‘भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज’ के प्रवक्ता अजय देवनानी ने प्रशासनिक नीति पर गंभीर सवाल उठाए:
“भोपाल में साल 2005 के बाद से यानी बीते 21 वर्षों में नया ‘मास्टर प्लान’ लागू नहीं हुआ है। जब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने नए कमर्शियल जोन ही नोटिफाई नहीं किए, तो व्यापारी अपनी दुकानें कहां ले जाएं? हम कमर्शियल दर पर बिजली बिल और संपत्ति कर चुका रहे हैं तथा नगर निगम से ट्रेड लाइसेंस भी प्राप्त हैं।” — व्यापारी प्रतिनिधिमंडल
व्यापारी संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि गुजरात राज्य की तर्ज पर कोई मध्यम मार्ग (Gujarat Model) निकाला जाए, जहां रिहायशी इलाकों में सीमित और चयनित व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन की कानूनी अनुमति दी जाती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
भोपाल में आवासीय परिसरों के व्यावसायिक उपयोग पर सुप्रीम कोर्ट के कड़े तेवरों ने नगर निगम प्रशासन और दुकानदारों दोनों को असमंजस में डाल दिया है। एक ओर जहां कॉलोनियों में रहने वाले नागरिक शांति और सुरक्षित माहौल की राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हजारों व्यापारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाली स्टेटस रिपोर्ट के बाद ही तय होगा कि राजधानी में इस सीलिंग अभियान का अगला चरण किस रूप में सामने आता है।



