नई दिल्ली | 16 अप्रैल, 2026
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत के भविष्य के ऊर्जा रोडमैप का खाका पेश करते हुए घोषणा की कि देश हाइड्रोजन, परमाणु ऊर्जा और नवाचार के मेल से वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। ‘वर्ल्ड हाइड्रोजन एनर्जी समिट’ को संबोधित करते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की रणनीति केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक आत्मनिर्भर और नवाचार-आधारित इकोसिस्टम बनाने पर केंद्रित है।
2047 का लक्ष्य: परमाणु ऊर्जा का विस्तार
भारत ने अपनी परमाणु क्षमता को लेकर महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की घोषणा की है। डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार:
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परमाणु ऊर्जा मिशन: भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट (GW) परमाणु शक्ति प्राप्त करना है।
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छोटे रिएक्टरों पर जोर: 2033 तक पांच छोटे परमाणु रिएक्टर विकसित करने की योजना है। इनमें से तीन पर काम शुरू हो चुका है, जिसमें ‘भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर’ (SMR) और ‘भारत स्मॉल रिएक्टर’ (BSR) प्रमुख हैं।
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निजी भागीदारी: परमाणु क्षेत्र को अब निजी भागीदारी के लिए खोल दिया गया है, जिससे स्टार्टअप्स और MSMEs को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा अवसर मिलेगा।
ग्रीन हाइड्रोजन: वैकल्पिक ईंधन का भविष्य
स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में 19,744 करोड़ रुपये के परिव्यय वाला ‘राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ भारत को वैश्विक अग्रणी देशों की कतार में खड़ा कर रहा है।
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यह मिशन स्टील और सीमेंट जैसे भारी उद्योगों को कार्बन मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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सरकार का ध्यान इलेक्ट्रोलाइज़र जैसी तकनीकों के स्वदेशी विनिर्माण पर है ताकि उत्पादन लागत को कम किया जा सके।
ऊर्जा रोडमैप के अन्य प्रमुख स्तंभ
मंत्री ने भारत की बहुआयामी रणनीति के कई अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को भी साझा किया:
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प्राकृतिक गैस: ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य है।
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सर्कुलर इकोनॉमी: कृषि अवशेषों और इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल को जैव ईंधन में बदलने की पहल की जा रही है।
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महासागरीय ऊर्जा: ‘डीप ओशन मिशन’ के तहत समुद्र से ऊर्जा प्राप्त करने के नए क्षेत्रों पर काम चल रहा है।
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निवेश: तेल और गैस क्षेत्र में लगभग 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
रोजगार और नवाचार के नए अवसर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा का यह संक्रमण केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभकारी है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी रीसाइक्लिंग और ग्रिड प्रबंधन जैसे क्षेत्र लाखों की संख्या में ‘ग्रीन जॉब्स’ (हरित नौकरियां) पैदा कर रहे हैं।
“भारत की तकनीकी क्षमता और सही नीतिगत दिशा उसे वैश्विक डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए तैयार करती है।” — डॉ. जितेंद्र सिंह
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