मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित भारत भवन में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया महोत्सव ‘प्रणाम उदन्त मार्त्तण्ड’ अपने अंतिम चरण में है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) और वीर भारत न्यास के इस संयुक्त आयोजन में राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश ने 2047 तक ‘नए भारत’ के निर्माण में मीडिया की अहम भूमिका और देश की मजबूत अर्थव्यवस्था का खाका खींचा। इस महामंथन का समापन आज प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति में होगा।
2047 का लक्ष्य: स्टार्टअप्स, यूपीआई और सुदृढ़ अर्थव्यवस्था
‘नए भारत का निर्माण और हम भारत के लोग’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश ने कहा कि देश के विकास का रोडमैप बनाने में हम 66 साल पिछड़ गए थे, लेकिन 2014 के बाद हमने 2047 के भारत का स्पष्ट लक्ष्य तय किया है। उन्होंने चाणक्य, स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्भर और उद्यमशील भारत की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री हरिवंश ने डिजिटल इंडिया की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय इस विचार का उपहास उड़ाया गया था, लेकिन आज देश के कोने-कोने में यूपीआई (UPI) से भुगतान हो रहा है और 57 करोड़ से अधिक सक्रिय बैंक खाते हैं। उन्होंने आगाह किया कि जो देश तकनीक में पिछड़ जाता है, उसके लिए गुलामी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
पत्रकारिता का वैचारिक अधिष्ठान: राष्ट्र प्रथम
कार्यक्रम में ‘भारतीय पत्रकारिता के वैचारिक अधिष्ठान’ विषय पर भी गंभीर चर्चा हुई। दिग्गज विचारकों और संपादकों ने एक स्वर में कहा कि स्वबोध से ही भारत बोध संभव है।
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विचार सर्वोपरि: वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल केतकर ने स्पष्ट किया कि पत्रकारिता में भाषा केवल माध्यम है, असली महत्व विचारों का है। उन्होंने कहा कि स्वधर्म, स्वभाषा और स्वदेशी की लड़ाई को ‘कम्युनल’ मान लेना एक बड़ी विडंबना रही है।
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देश के प्रति समर्पण: वरिष्ठ पत्रकार विष्णु प्रकाश त्रिपाठी ने तटस्थता के नाम पर होने वाले पक्षपात पर प्रहार करते हुए कहा कि एक पत्रकार को अपने देश और समाज के प्रति ‘पक्षपाती’ होना ही चाहिए।
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एकत्व का भाव: पुदुचेरी विश्वविद्यालय के डॉ. सी. जयशंकर बाबू और पश्चिम बंगाल की प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय ने राष्ट्रीय अस्मिता को भाषाई बंधनों से ऊपर बताया।
भूमंडलीकरण, एआई (AI) की चुनौती और मुक्त मीडिया
‘भूमंडलीकरण के बाद का भारत और मीडिया’ विषय पर चर्चा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने वर्तमान को मीडिया के लिए ‘सबसे अच्छा दौर’ बताया, जहां सूचनाओं को बाधित करने का एकाधिकार समाप्त हो चुका है।
तकनीक और विश्वसनीयता के मुद्दे पर टीवी पत्रकार श्री सईद अंसारी और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह ने कहा कि आज पत्रकारिता मिशनरी से अधिक प्रोफेशनल हो गई है, लेकिन समाज के प्रति इसका उत्तरदायित्व कम नहीं हुआ है। भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी पत्रकारिता, आज नेतृत्वकर्ता की भूमिका में है। वहीं, श्री प्रत्यूष रंजन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर जोर देते हुए कहा कि “एआई हमें डिक्टेट न करे, बल्कि हम एआई को डिक्टेट करें।”
इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ पत्रकार नगमा सहर ने पठन-पाठन की आदत और सब्सक्रिप्शन मॉडल की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि दिलीप कुमार शर्मा ने पूर्वोत्तर राज्यों में मीडिया की धीमी लेकिन सकारात्मक प्रगति का खाका पेश किया।
कार्टून कार्यशाला और आज का भव्य समापन
समारोह के दौरान 9 ख्यातिप्राप्त कार्टूनिस्टों (सुभानी शेख, माधव जोशी, हरि मोहन बाजपेई आदि) ने ‘हिंदुस्तानियों के हित के हेत’ विषय पर लाइव कार्टून बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया।
महोत्सव के तीसरे और अंतिम दिन आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में शाम 6 बजे समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। इससे पूर्व “स्वाभिमानी भारत” और “भारतीय भाषाओं का राष्ट्रीय स्वर” जैसे महत्वपूर्ण सत्रों में प्रख्यात निर्देशक डॉ. चन्द्र प्रकाश द्विवेदी, पत्रकार हितेश शंकर, हर्षवर्धन त्रिपाठी और प्रतीक त्रिवेदी सहित कई दिग्गज हस्तियां अपने विचार साझा करेंगी।



