राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सम्मेलन 2026: आतंकवाद और साइबर खतरों से निपटने के लिए भारत ने कसी कमर
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सम्मेलन 2026 ने भारत की भविष्य की सुरक्षा रणनीति की नींव रख दी है। इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में देश के शीर्ष सुरक्षा विशेषज्ञों और राज्यों के पुलिस प्रमुखों ने उभरती हुई आंतरिक और बाहरी सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘सुरक्षित भारत’ को धरातल पर उतारने के लिए इस बैठक में आधुनिक तकनीक और इंटेलिजेंस शेयरिंग पर विशेष जोर दिया गया।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना और भविष्य के युद्धक्षेत्र, जैसे साइबर स्पेस और ड्रोन तकनीक से निपटने के लिए एक साझा ढांचा तैयार करना है।
मुख्य बिंदु
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इंटेलिजेंस हब का सुदृढ़ीकरण: देश भर में सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म को और मजबूत करने पर सहमति बनी।
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साइबर सुरक्षा प्राथमिकता: वित्तीय धोखाधड़ी और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर होने वाले साइबर हमलों को रोकने के लिए ‘ज़ीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर’ अपनाने का सुझाव।
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ड्रोन तकनीक का मुकाबला: सीमावर्ती क्षेत्रों में दुश्मन के ड्रोनों को रोकने के लिए स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती में तेजी लाना।
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कट्टरपंथ के खिलाफ अभियान: युवाओं के बीच ऑनलाइन कट्टरपंथ को रोकने के लिए समुदाय-आधारित पुलिसिंग और सोशल मीडिया निगरानी को बढ़ाने पर चर्चा।
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नार्को-टेररिज्म पर प्रहार: नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद के गठजोड़ को तोड़ने के लिए सख्त कानूनों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान।
सुरक्षा ढांचे में आधुनिक तकनीक का समावेश
इस राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सम्मेलन 2026 में सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि अब युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके संदिग्ध गतिविधियों का पूर्वानुमान लगाना अब अनिवार्य हो गया है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पुलिस बलों को ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ की दिशा में ले जाना होगा, जहाँ वे तकनीक की मदद से अपराध होने से पहले ही उसे रोकने में सक्षम हों। बैठक में नक्सलवाद और उत्तर-पूर्व के अलगाववाद जैसे मुद्दों पर भी अपडेट साझा किए गए, जहाँ सुरक्षा बलों ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
जमीनी समन्वय और राज्यों की भूमिका
सम्मेलन के दौरान यह रेखांकित किया गया कि केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के बीच कोई ‘साइलो’ (दूरी) नहीं होनी चाहिए। सीमा प्रबंधन और तटीय सुरक्षा के लिए राज्यों की पुलिस को केंद्र के साथ रियल-टाइम डेटा साझा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रधानमंत्री के “एक राष्ट्र, एक पुलिस वर्दी” के विचार के बाद, सुरक्षा प्रक्रियाओं के मानकीकरण पर भी तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सम्मेलन 2026 केवल एक बैठक नहीं, बल्कि भारत को सुरक्षित और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत अपनी आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है। आने वाले समय में इन फैसलों का असर जमीन पर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के रूप में देखने को मिलेगा।



