पीएम-वाणी योजना में बड़े बदलाव: अब क्यूआर-कोड से कनेक्ट होगा लैपटॉप, 15 मिनट के छोटे प्लान भी शुरू
भारत में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने पीएम-वाणी (PM-WANI) यानी प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस के ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य सार्वजनिक वाई-फाई को आम नागरिकों के लिए अधिक सुलभ, सस्ता और उपयोग में आसान बनाना है। नए दिशानिर्देशों के तहत अब लैपटॉप जैसे सेकेंडरी उपकरणों के लिए क्यूआर-आधारित प्रमाणीकरण की सुविधा शुरू की गई है।
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क्यूआर-कोड आधारित लॉगिन: अब उपयोगकर्ता अपने स्मार्टफोन ऐप के जरिए क्यूआर कोड स्कैन करके लैपटॉप को सीधे वाई-फाई से कनेक्ट कर सकेंगे।
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लचीले अल्पावधि प्लान: यात्रियों और छात्रों की सुविधा के लिए 15, 30 और 60 मिनट की छोटी अवधि वाले वाई-फाई प्लान पेश करने की सलाह दी गई है।
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एसएसआईडी का मानकीकरण: उपयोगकर्ताओं को असली नेटवर्क पहचानने में मदद के लिए पीएम-वाणी हॉटस्पॉट नामों (SSID) को ब्रांडिंग के साथ मानकीकृत किया गया है।
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कार्यान्वयन: सभी हितधारकों को आठ सप्ताह के भीतर इन संशोधित दिशानिर्देशों को लागू करने का निर्देश दिया गया है। नई सुविधाएं जुलाई 2026 तक पूरी तरह चालू हो जाएंगी।
क्यों है यह बदलाव अहम?
वर्तमान डिजिटल युग में सार्वजनिक वाई-फाई छात्रों, यात्रियों, पेशेवरों और छोटे व्यवसायियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा बनकर उभरा है। संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में दूरसंचार विभाग ने इस परिवेश में व्यापक बदलाव किए हैं। अब तक सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग मुख्य रूप से स्मार्टफोन तक सीमित था, लेकिन लैपटॉप पर क्यूआर-आधारित कनेक्टिविटी मिलने से कामकाज और पढ़ाई में आसानी होगी।
इसके अलावा, 15, 30 और 60 मिनट के ‘पाउच-शैली’ प्लान सार्वजनिक परिवहन केंद्रों, मॉल और सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद लोगों के लिए बेहद किफायती साबित होंगे। इससे न केवल आम नागरिकों का डिजिटल अनुभव बेहतर होगा, बल्कि सेवा प्रदाताओं के लिए भी राजस्व के नए द्वार खुलेंगे।
निष्कर्ष
पीएम-वाणी योजना में किए गए ये उपयोगकर्ता-अनुकूल सुधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन का हिस्सा हैं। इसका लक्ष्य देश के हर कोने में सस्ता और सुलभ इंटरनेट पहुंचाना है। जुलाई 2026 तक इन सुविधाओं के पूरी तरह लागू होने से भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और अधिक सशक्त होगी, जिससे समावेशी डिजिटल कनेक्टिविटी का सपना साकार होगा।



