राष्ट्र की सुरक्षा: आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘शून्य सहिष्णुता’ के 12 वर्ष और ऐतिहासिक परिणाम

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  • Alt-Text: आतंकवाद के खिलाफ अभियान में मुस्तैद भारतीय सुरक्षा बल के जवान

  • Caption: आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘शून्य सहिष्णुता’ (Zero Tolerance) नीति ने पिछले 12 वर्षों में देश की आंतरिक और सीमा-पार सुरक्षा को अभूतपूर्व मजबूती दी है।

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राष्ट्र की सुरक्षा: आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘शून्य सहिष्णुता’ के 12 वर्ष

पिछले 12 वर्षों (2014-2026) में, भारत के व्यापक आतंकवाद-विरोधी बदलाव आतंकवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता (Zero Tolerance) के दृढ़ दृष्टिकोण को दिखाते हैं। मजबूत कानूनी ढाँचे, संस्थागत सुधार और खुफिया जानकारी के एकीकरण ने केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध लक्षित कार्रवाई, आतंकी फंडिंग नेटवर्क का खात्मा और पुलिस एवं सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण ने राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना को सुदृढ़ किया है। इन निरंतर प्रयासों ने आंतरिक सुरक्षा संकेतकों में भारी सुधार किया है, जिनमें आतंकी घटनाओं और मृत्यु संख्या में तेज गिरावट शामिल है।

ठोस निर्णय और निर्णायक कार्यों का एक दशक

सरकार ने प्रतिक्रियात्मक उपायों से आगे बढ़कर एक सक्रिय, ‘समग्र सरकारी दृष्टिकोण’ विकसित किया है। इन बारह वर्षों के निरंतर प्रयासों से आया परिवर्तन तीन परस्पर जुड़े परिणामों पर आधारित है:

  1. विश्वास: निर्णायक कार्रवाई के माध्यम से जनता का विश्वास बहाल करना।

  2. विकास: एक मजबूत कानूनी और संस्थागत सुरक्षा संरचना का निर्माण।

  3. जन-कल्याण: एक सुरक्षित वातावरण का निर्माण जिसमें विकास, गरिमा और सामान्य जीवन फल-फूल सके।

2014 का चुनौती परिदृश्य: जब सुरक्षा व्यवस्था थी खंडित

मई 2014 में जब वर्तमान सरकार ने सत्ता संभाली, तब उसे कई मोर्चों पर अनसुलझे संघर्षों से ग्रस्त सुरक्षा व्यवस्था विरासत में मिली थी।

  • आतंकी घटनाओं का चरम: 2004-2014 के दौरान 7,217 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं।

  • घुसपैठ और राज्य प्रायोजित आतंकवाद: पाकिस्तान की ISI के समर्थन से लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों ने शांति भंग की। (उदा. 2008 का मुंबई हमला)।

  • कश्मीर में अस्थिरता: 2010 से 2014 तक औसतन हर साल 2,654 संगठित पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं।

  • उभरते खतरे: ISIS का वैश्विक उदय, ऑनलाइन कट्टरपंथ, और डार्क वेब/क्रिप्टोकरेंसी के जरिए आतंकी फंडिंग।

भारत की आतंक-विरोधी नीति: 4 मजबूत स्तंभ और ‘प्रहार’ रणनीति

इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत ने ‘प्रहार: भारत की राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति और रणनीति’ को आकार दिया, जो चार मुख्य स्तंभों पर टिकी है:

स्तंभ 1: विधायी सशक्तीकरण (कानूनी सुधार)

  • UAPA संशोधन अधिनियम, 2019: इस ऐतिहासिक संशोधन ने सरकार को संगठनों के साथ-साथ व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित करने का अधिकार दिया। इसके तहत मसूद अज़हर, हाफ़िज़ सईद और कई खालिस्तानी गुर्गों सहित 57 व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया गया।

  • NIA संशोधन अधिनियम, 2019: NIA के अधिकार क्षेत्र का विस्तार कर इसे भारत के बाहर भारतीय हितों के विरुद्ध किए गए अपराधों और साइबर आतंकवाद की जांच का अधिकार दिया गया।

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023: 1 जुलाई 2024 से लागू इस संहिता में पहली बार ‘आतंकवाद’ और ‘संगठित अपराध’ को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया और मृत्युदंड या आजीवन कारावास जैसे कठोर दंड के प्रावधान किए गए।

  • शस्त्र (संशोधन) अधिनियम, 2019: अवैध हथियारों की तस्करी और निर्माण पर कड़ा प्रहार किया गया।

स्तंभ 2: संस्थागत सुदृढ़ीकरण

  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का विस्तार: NIA का बजट 2014 के 91.32 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2024-25 में 394.66 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसकी दोषसिद्धि दर 92.70% है, जो वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ में से एक है।

  • इंटेलिजेंस इंटीग्रेशन: बहु-एजेंसी केंद्र (MAC), NATGRID, और साइबर बहु-एजेंसी केंद्र (CyMAC – जनवरी 2025 स्थापित) के जरिए रियल-टाइम खुफिया जानकारी का साझाकरण सुनिश्चित किया गया।

  • CCTNS 2.0: सभी 17,798 पुलिस स्टेशनों को AI-संचालित इकोसिस्टम से जोड़ा गया।

स्तंभ 3: सीमा पार आतंकवाद पर प्रहार (रणनीतिक परिवर्तन)

भारत ने रणनीतिक संयम की नीति को त्याग कर निवारक (Pre-emptive) कार्रवाई का सिद्धांत अपनाया:

  • सर्जिकल स्ट्राइक (2016): उरी हमले के जवाब में नियंत्रण रेखा (LoC) के पार आतंकी लॉन्च पैडों का विनाश।

  • बालाकोट एयरस्ट्राइक (2019): पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान के भीतर जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर सटीक हवाई हमला।

  • ऑपरेशन सिंदूर (2025): अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के जवाब में PoK में आतंकवादी ढाँचे को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया।

स्तंभ 4: बहुपक्षीय और कूटनीतिक कूटनीति

  • FATF की कार्रवाई: भारत के प्रयासों से पाकिस्तान के आतंकी फंडिंग नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय निगरानी सुनिश्चित हुई।

  • ‘नो मनी फॉर टेरर’ (NMFT): 2022 में नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में भारत ने आतंकवाद-वित्तपोषण विरोधी रणनीति का नेतृत्व किया।

  • कूटनीतिक जीत: 2019 में मसूद अजहर को ‘वैश्विक आतंकवादी’ घोषित करवाना और 2025 में 26/11 के आरोपी तहव्वुर राणा का अमेरिका से सफल प्रत्यर्पण।

12 वर्षों के सुधारों के परिणाम: बढ़ता विश्वास, सुरक्षित भारत

जम्मू और कश्मीर: आतंकवाद से विकास की ओर

अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद, कश्मीर ने अभूतपूर्व शांति देखी है:

  • आतंकी घटनाओं में भारी कमी: 2018 में आतंकी हमलों से जुड़ी 228 घटनाएं थीं, जो 2025 में घटकर मात्र 12 रह गईं।

  • पत्थरबाजी शून्य: 2010-14 के बीच जहाँ हर साल 2,654 पत्थरबाजी की घटनाएं होती थीं, वे 2022 के बाद से लगभग शून्य हो गई हैं।

  • आर्थिक उछाल: 2024 में 2.3 करोड़ से अधिक पर्यटकों ने कश्मीर का दौरा किया। 2016 से 2026 के बीच क्षेत्र में लगभग 18,000 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ है।

आंतरिक इलाकों (Hinterland) में शांति

मजबूत खुफिया नेटवर्क से बड़े शहरी आतंकवादी हमलों (जैसे 2008 मुंबई या 2013 हैदराबाद धमाके) पर पूरी तरह लगाम लगी है।

वर्ष आतंकी हमलों की संख्या मारे गए नागरिकों की संख्या कार्रवाई में शहीद सुरक्षाकर्मी
2014 03 04
2015 01 03 04
2016 01 01 07
2017
2018 01 03

(नोट: 2018 के बाद से देश के आंतरिक इलाकों में बड़े आतंकी हमलों की संख्या नगण्य रही है, जिसे समय रहते खुफिया एजेंसियों द्वारा नाकाम कर दिया गया।)

निष्कर्ष

पिछले बारह वर्षों में, भारत ने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति के मार्गदर्शन में अपनी आतंकवाद-विरोधी संरचना में व्यापक परिवर्तन किया है। सरकार ने कानूनी ढाँचे को मजबूत किया है, जाँच संस्थानों का आधुनिकीकरण किया है और खतरों का समय पर पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए इंटर-एजेंसी समन्वय को बढ़ाया है। राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) जैसी संस्थाओं को अत्याधुनिक संसाधनों और वैश्विक स्तर की क्षमताओं से लैस किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप आज भारत न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का मजबूती से नेतृत्व भी कर रहा है।

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Saket Singh
Saket Singhhttp://purepolitics.in
MBA in Media Management from Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication, Bhopal

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