जबलपुर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सीएम मोहन यादव की खास मुलाकात, स्मृति चिन्हों का हुआ आदान-प्रदान
जबलपुर/भोपाल: मध्य प्रदेश प्रवास पर आईं देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से रविवार (21 जून 2026) को प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक अहम और आत्मीय सौजन्य भेंट की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और मोहन यादव के बीच यह गरिमामयी मुलाकात जबलपुर के सर्किट हाउस में संपन्न हुई। इस विशेष अवसर पर दोनों शीर्ष नेताओं के बीच न केवल आत्मीय संवाद हुआ, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और दोनों राज्यों (मध्य प्रदेश और ओडिशा) की समृद्ध धरोहरों को दर्शाने वाले भव्य स्मृति चिन्हों का आदान-प्रदान भी किया गया।
मुख्य बिंदु
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सर्किट हाउस में मुलाकात: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर सर्किट हाउस पहुंचकर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का पुष्पगुच्छ से आत्मीय स्वागत किया।
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मां नर्मदा की प्रतिमा: मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश की जनता की ओर से राष्ट्रपति को प्रदेश की ‘जीवनदायिनी’ मां नर्मदा की एक बेहद सुंदर और आकर्षक प्रतिमा भेंट की।
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भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सीएम यादव को पुरी के सुप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम और बहन सुभद्रा की अलौकिक तस्वीर सप्रेम उपहार में दी।
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कोणार्क चक्र की प्रतिकृति: राष्ट्रपति ने ओडिशा की ऐतिहासिक धरोहर ‘कोणार्क सूर्य मंदिर’ के विश्व प्रसिद्ध चक्र की भव्य प्रतिकृति (Replica) भी मुख्यमंत्री को भेंट की।
आस्था और सांस्कृतिक धरोहरों का अनूठा संगम
यह सौजन्य भेंट केवल एक औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा भेंट की गई ‘मां नर्मदा’ की प्रतिमा पूरे मध्य प्रदेश की श्रद्धा और प्राकृतिक संपदा का प्रतीक है। नर्मदा नदी को प्रदेश की जीवनरेखा माना जाता है और यह उपहार राज्य की इसी अटूट आस्था को दर्शाता है।
वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु (जो मूल रूप से ओडिशा से ताल्लुक रखती हैं) द्वारा दिए गए उपहारों में पूर्वी भारत की महान आध्यात्मिक और ऐतिहासिक परंपरा की झलक देखने को मिली। पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ की तस्वीर और विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर का चक्र भारतीय वास्तुकला और सनातन संस्कृति के वो मजबूत स्तंभ हैं, जो इस मुलाकात के जरिए मध्य प्रदेश और ओडिशा की सांस्कृतिक दूरियों को मिटाते हुए नजर आए।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति के मध्य प्रदेश दौरे के दौरान जबलपुर में हुई यह मुलाकात प्रदेशवासियों के लिए एक गौरव का क्षण है। संवैधानिक प्रमुख और राज्य के मुखिया के बीच स्मृति चिन्हों का यह आदान-प्रदान न केवल आपसी सम्मान का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी उस महान भारतीय परंपरा को भी जीवंत करता है जहाँ अ



