भारत का पहला डेंगू टीका: CDSCO ने ‘Qdenga’ वैक्सीन को दी मंजूरी, जानिए किसे और कैसे लगेगी खुराक
नई दिल्ली: भारत में डेंगू के प्रकोप से निपटने और इसके प्रभावी नियंत्रण की दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने भारत का पहला डेंगू टीका ‘क्यूडेंगा®’ (Qdenga®) के विपणन और इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। यह कदम देश में प्रतिवर्ष डेंगू से प्रभावित होने वाले लाखों लोगों को राहत पहुंचाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा।
इस टीके का निर्माण जर्मनी की टाकेदा जीएमबीएच (Takeda GmbH) द्वारा किया गया है और भारत में इसका आयात मेसर्स टाकेदा बायोफार्मास्यूटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत गहन वैज्ञानिक मूल्यांकन, सुरक्षा जांच और प्रभावकारिता के आधार पर इस वैक्सीन को भारतीय बाजार में उतारने की अनुमति दी गई है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
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पहला स्वीकृत टीका: ‘Qdenga®’ (क्यूडेंगा) भारत में डेंगू रोग की रोकथाम के लिए स्वीकृत होने वाला पहला आधिकारिक टीका बन गया है।
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आयु सीमा: यह टीका 4 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक की आयु के व्यक्तियों को डेंगू के संक्रमण से बचाने के लिए दिया जाएगा।
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खुराक और अंतराल: 0.5 मिलीलीटर की दो खुराकें (Subcutaneous Injection) 3 महीने के अंतराल (0 और 3 महीने) पर दी जाएंगी।
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वैश्विक स्वीकार्यता: इस वैक्सीन को यूरोपीय संघ, ग्रेट ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, थाईलैंड और मलेशिया सहित 42 से अधिक देशों में पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।
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WHO प्री-क्वालिफिकेशन: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे प्री-क्वालिफाइड किया है और वैश्विक स्तर पर इसकी 2.4 करोड़ (24 मिलियन) से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं।
कैसे काम करती है यह डेंगू वैक्सीन? (How Qdenga Works)
‘क्यूडेंगा®’ एक रिकॉम्बिनेंट लाइव-एटेन्यूएटेड टेट्रावेलेंट डेंगू वैक्सीन (Recombinant Live-Attenuated Dengue Vaccine) है। इसे आधुनिक रिकॉम्बिनेंट डीएनए तकनीक (DNA Technology) का उपयोग करके विकसित किया गया है। यह वैक्सीन वेरो कोशिकाओं में तैयार की जाती है और इसमें डेंगू वायरस टाइप-2 के मुख्य ढांचे में सीरोटाइप-विशिष्ट सतह प्रोटीन को एनकोड करने वाले जीन शामिल होते हैं।
यह टीका सूखे पाउडर (Freeze-dried powder) के रूप में आता है, जिसे घुलनशील माध्यम में मिलाकर त्वचा के ठीक नीचे (Subcutaneous) इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को डेंगू के चारों मुख्य सीरोटाइप के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित करने के लिए प्रेरित करता है।
व्यापक नैदानिक परीक्षण और सुरक्षा रिकॉर्ड
इस टीके की मंजूरी एक बड़े अंतरराष्ट्रीय और घरेलू नैदानिक अध्ययन (Clinical Trial) के आंकड़ों पर आधारित है। ब्राजील, थाईलैंड और श्रीलंका सहित 8 से अधिक देशों में इसके व्यापक ट्रायल किए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में भी 4 से 60 वर्ष के आयु वर्ग के प्रतिभागियों पर चरण-III (Phase-III) का सुरक्षा और इम्युनोजेनिसीटी अध्ययन पूरा किया गया, जिसमें इसके परिणाम बेहद सुरक्षित और प्रभावी पाए गए।
वैश्विक स्तर पर वितरित की जा चुकीं 2.4 करोड़ खुराकों के पोस्ट-मार्केटिंग डेटा से भी यह स्पष्ट हुआ है कि इस टीके से जुड़ी कोई गंभीर सुरक्षा चिंता या साइड-इफेक्ट सामने नहीं आया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को मिलेगा बल
भारत में डेंगू एक प्रमुख वेक्टर जनित बीमारी है, जो हर साल मानसून के दौरान और उसके बाद भारी तबाही मचाती है। सीडीएससीओ की इस मंजूरी से राष्ट्रीय वाहक जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NCVBDC) के प्रयासों को एक नई दिशा मिलेगी। अब तक भारत सरकार केवल मच्छर नियंत्रण, निगरानी, त्वरित जांच और रोगी प्रबंधन पर निर्भर थी, लेकिन इस टीके के आने से अब डेंगू से पहले ही सुरक्षा कवच तैयार किया जा सकेगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
भारत में ‘Qdenga’ को मिली मंजूरी न केवल चिकित्सा विज्ञान की एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह हर साल डेंगू के दंश से जूझने वाले आम नागरिकों के लिए भी एक बड़ी राहत की खबर है। स्वास्थ्य मंत्रालय की यह पहल साबित करती है कि भारत सुरक्षित, प्रभावी और उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं को अपने नागरिकों तक समय पर पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।



