भारत की परमाणु शक्ति में ऐतिहासिक उछाल: कलपक्कम के ‘फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ ने हासिल की पहली क्रिटिकैलिटी

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नई दिल्ली/कलपक्कम | 07 अप्रैल, 2026

भारत ने अपने तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश करते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल, 2026 की रात 8:25 बजे सफलतापूर्वक ‘प्रथम क्रिटिकैलिटी’ (नियंत्रित विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया की शुरुआत) प्राप्त कर ली है।

यह उपलब्धि परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) की गहन सुरक्षा समीक्षा के बाद मिली, जिसे परमाणु ऊर्जा विभाग के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति में अंजाम दिया गया।

मुख्य बिंदु: क्या है यह उपलब्धि?

  • स्वदेशी तकनीक: रिएक्टर का डिजाइन इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा विकसित किया गया है और इसका संचालन भाविनी (BHAVINI) द्वारा किया जा रहा है।

  • ऊर्जा सुरक्षा: यह रिएक्टर भारत के सीमित यूरेनियम भंडार का अधिकतम उपयोग करने और भविष्य में थोरियम के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की राह प्रशस्त करेगा।

  • अद्वितीय क्षमता: यह एक ऐसा रिएक्टर है जो अपनी खपत से अधिक ईंधन पैदा करने की क्षमता रखता है।

PFBR कैसे काम करता है? (तकनीकी पहलू)

पारंपरिक थर्मल रिएक्टरों के विपरीत, PFBR एक बंद ईंधन चक्र पर आधारित है। इसकी कार्यप्रणाली को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  1. ईंधन: यह यूरेनियम-प्लूटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग करता है।

  2. प्रजनन (Breeding): रिएक्टर का कोर यूरेनियम-238 की परत से घिरा होता है। तीव्र न्यूट्रॉन इस ‘उपजाऊ’ यूरेनियम को ‘विखंडनीय’ प्लूटोनियम-239 में बदल देते हैं।

  3. थोरियम की ओर कदम: भविष्य में यह रिएक्टर थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में परिवर्तित करेगा, जो भारत के परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण का आधार बनेगा।

  4. शीतलक: इसमें उच्च तापमान वाले तरल सोडियम को कूलेंट के रूप में इस्तेमाल किया गया है।

सामरिक और आर्थिक महत्व

“यह उपलब्धि न केवल एक तकनीकी सफलता है, बल्कि ‘विकसित भारत’ के लिए एक सतत और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम है।”

यह परियोजना भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, क्योंकि इसमें उपयोग किए गए अधिकांश घटक और तकनीक स्वदेशी हैं। इससे न केवल स्वच्छ और कम कार्बन वाली बिजली मिलेगी, बल्कि परमाणु अपशिष्ट (Waste) को कम करने और सामग्रियों के पुनर्चक्रण में भी मदद मिलेगी।

परमाणु कार्यक्रम के तीन चरण: एक नजर में

  • चरण 1: प्रेशराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) – वर्तमान में सक्रिय

  • चरण 2: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) – (कलपक्कम की उपलब्धि के साथ पूर्णता की ओर)

  • चरण 3: थोरियम आधारित रिएक्टर – भविष्य का लक्ष्य

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Saket Singh
Saket Singhhttp://purepolitics.in
MBA in Media Management from Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication, Bhopal

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