भोपाल : 8 अप्रैल, 2026
राज्य सरकार ने गृह एवं विधि विभाग को UCC का मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए; सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनेगी समिति।
मुख्य बिंदु
- जुलाई–अगस्त 2026 के मानसून सत्र में UCC विधेयक पेश करने का लक्ष्य
- 45 दिनों में उत्तराखंड व गुजरात के कानूनों का अध्ययन करेगी समिति
- आदिवासी समुदाय को UCC के दायरे से बाहर रखने की संभावना
- लिव-इन संबंधों का जिला स्तर पर अनिवार्य पंजीकरण होगा
- बहुविवाह पर प्रतिबंध, महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार
उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब मध्य प्रदेश भी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर राज्य के गृह एवं विधि विभाग को UCC का मसौदा तैयार करने का काम सौंपा गया है। सूत्रों के अनुसार इसे जुलाई-अगस्त में होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।
इस कानून के तहत विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान नियम लागू होंगे।
महिलाओं को क्या मिलेगा?
UCC का सबसे बड़ा प्रभाव महिला अधिकारों पर पड़ने की संभावना है। बेटियों को पिता की संपत्ति में बेटों के बराबर कानूनी हक मिलेगा। बहुविवाह पर रोक लगेगी और तलाक की प्रक्रिया सभी धर्मों की महिलाओं के लिए एक जैसी होगी। गुजारे-भत्ते के नियम भी स्पष्ट और समान बनाए जाएंगे।
लिव-इन संबंध में रहने वाले जोड़ों को जिला प्रशासन के पास अनिवार्य पंजीकरण कराना होगा, जिससे ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों को कानूनी दर्जा और संपत्ति में अधिकार मिल सके।
पृष्ठभूमि
दिसंबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने UCC लागू करने की घोषणा की थी, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनावों के चलते यह मामला आगे नहीं बढ़ सका। इस वर्ष फरवरी में RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की ओर से UCC पर आगे बढ़ने का सुझाव मिलने के बाद प्रदेश सरकार ने फिर से इस पर काम शुरू किया। उत्तराखंड 27 जनवरी 2025 से UCC लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है, जहां आदिवासी समुदाय को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
“जब देश में समान शिक्षा, समान रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ सबको चाहिए, तो कानून भी सबके लिए समान होना चाहिए।”
— रामेश्वर शर्मा, भाजपा विधायक, हुजूर (भोपाल)
“सरकार को बस आमजन का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए एक विषय चाहिए था — UCC उनके लिए वही मुद्दा है।”
— आरिफ मसूद, कांग्रेस विधायक, भोपाल मध्य
मसूद ने यह भी सवाल उठाया कि यदि आदिवासी वर्ग को UCC से बाहर रखा जाता है, तो यह वास्तव में “समान” नागरिक संहिता कैसे होगी।



