मुख्य बिंदु:
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27 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में सजा के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील।
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वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा कर सकते हैं पैरवी।
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विधानसभा सदस्यता रद्द होने के बाद दतिया सीट पर मंडरा रहे उपचुनाव के बादल।
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विशेषज्ञों का अनुमान: आज केवल नोटिस जारी होने की संभावना, तत्काल ‘स्टे’ मुश्किल।
दतिया का सियासी भविष्य अब कोर्ट की दहलीज पर
मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया का सियासी पारा चरम पर है। पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर आज मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट में बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। 27 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा 3 साल की सजा सुनाए जाने के बाद भारती की विधानसभा सदस्यता शून्य कर दी गई थी। अब उनकी पूरी उम्मीदें हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।
दिग्गज वकीलों की फौज: क्या सिब्बल दिला पाएंगे राहत?
सूत्रों के अनुसार, राजेंद्र भारती ने अपनी कानूनी लड़ाई के लिए देश के सबसे महंगे और अनुभवी वकीलों को मैदान में उतारा है। कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा जैसे दिग्गज कानूनविद आज कोर्ट में उनका पक्ष रख सकते हैं।
भारती के खेमे की मांग है कि:
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निचली अदालत के फैसले और सजा पर तत्काल रोक (Stay) लगाई जाए।
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सजा पर रोक मिलते ही उनकी विधायकी बहाल करने का मार्ग प्रशस्त हो।
हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पहले दिन कोर्ट आमतौर पर सभी पक्षों को नोटिस जारी करता है, इसलिए तत्काल राहत की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।
दतिया में उपचुनाव की सुगबुगाहट तेज
राजेंद्र भारती ने 2023 के चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेता और तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराकर सुर्खियां बटोरी थीं। अब उनकी सदस्यता रद्द होने के बाद दतिया सीट पर फिर से चुनावी बिसात बिछने लगी है।
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निर्वाचन आयोग की सक्रियता: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने चुनाव आयोग को दतिया सीट के रिक्त होने की आधिकारिक सूचना दे दी है।
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राजनीतिक दांव-पेच: यदि आज कोर्ट से ‘स्टे’ नहीं मिलता है, तो निर्वाचन आयोग किसी भी समय उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है।
विधानसभा से भी बढ़ा दबाव
बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा ने 2 अप्रैल को ही भारती की सदस्यता रद्द करने के साथ-साथ उन्हें ‘सदस्य सुविधा समिति’ से भी बाहर कर दिया था। दतिया के साथ-साथ पूरे प्रदेश की नजरें आज दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हैं, क्योंकि यह फैसला तय करेगा कि मध्य प्रदेश की राजनीति में अगला बड़ा मुकाबला कहां होगा।



