पन्ना/छतरपुर | 06 अप्रैल 2026 रिपोर्टर:
Highlights:
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44,000 करोड़ की केन-बेतवा लिंक परियोजना का काम दूसरे दिन भी बंद।
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हजारों आदिवासी महिलाओं ने मुख्य बाँध स्थल पर डाला डेरा।
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दिल्ली कूच से रोकने और राशन छीनने का प्रशासन पर आरोप।
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सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर बोले- “दमन से और मजबूत होगा आंदोलन।”
परियोजना स्थल बना ‘रणक्षेत्र’: आदिवासी महिलाओं ने संभाला मोर्चा
पन्ना-छतरपुर सीमा: केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन अब उग्र चरण में पहुंच गया है। पन्ना नेशनल पार्क के कोर क्षेत्र में निर्माणाधीन इस परियोजना के मुख्य बाँध स्थल पर हजारों आदिवासियों और किसानों ने कब्जा कर लिया है। विशेष रूप से आदिवासी महिलाओं के उग्र तेवर के चलते पिछले 48 घंटों (5 अप्रैल से) से 44,000 करोड़ रुपये की इस महात्वाकांक्षी परियोजना का काम पूरी तरह ठप पड़ा है।
“प्रशासन ने छीना हमारा राशन” – आंदोलनकारियों का गंभीर आरोप
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने बताया कि आदिवासी समुदाय अपनी बात रखने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जा रहा था। लेकिन प्रशासन ने उन्हें जगह-जगह रोककर प्रताड़ित किया। आरोप है कि पुलिस और प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों का इकट्ठा किया गया राशन तक छीन लिया।
अमित भटनागर ने तीखा हमला बोलते हुए कहा:
“शासन-प्रशासन लगातार झूठे आश्वासन दे रहा है। जब कानून ग्राम सभा की सहमति और पारदर्शी सर्वे की बात करता है, तो बिना प्रक्रिया पूरे किए लोगों को उजाड़ा क्यों जा रहा है? प्रशासन जितना दमन करेगा, यह जनसंग्राम उतना ही मजबूत होगा।”
तहसीलदार के सामने आदिवासी महिलाओं के तीखे सवाल
विवाद बढ़ता देख सटई तहसील के तहसीलदार इंद्र कुमार गौतम मौके पर पहुंचे, लेकिन उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सीधा सवाल पूछा— “क्या आदिवासियों के घर उजाड़ना ही सरकार का कानून है?”
आदिवासी महिलाओं का कहना है कि उन्हें परियोजना के बारे में कोई बुनियादी जानकारी नहीं दी गई है। जब वे न्याय की गुहार लगाने दिल्ली जाना चाहती थीं, तो उन्हें अपराधी की तरह रास्ते में रोका गया, जिससे अब प्रशासन पर से उनका भरोसा पूरी तरह उठ चुका है।
जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए जुटे हजारों लोग
बाँध स्थल पर वर्तमान में हजारों लोग डटे हुए हैं। इस आंदोलन में जय किसान संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण शामिल हैं।
प्रमुख सहभागी: आंदोलन में बबलू यादव (पूर्व सरपंच), मकुंदी आदिवासी (उपसरपंच), राकेश तिवारी, मंगल यादव, दिव्या अहिरवार, लक्ष्मी आदिवासी, और सैकड़ों की संख्या में आदिवासी महिलाएं जैसे शीला नगर, बिट्टी आदिवासी और देवका अहिरवार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।



