भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर राज्यसभा चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। साल 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के विद्रोह और कमलनाथ सरकार के पतन की यादें अभी ताजा ही थीं कि जून 2026 में खाली हो रही तीन राज्यसभा सीटों ने कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं। संख्याबल में सुरक्षित दिखने वाली एक सीट पर अब ‘क्रॉस वोटिंग’ और ‘कानूनी अड़चनों’ का साया मंडरा रहा है।
संख्याबल का बिगड़ा गणित: 66 से 62 पर सिमटी कांग्रेस
विधानसभा की 230 सीटों के समीकरण में कांग्रेस के पास शुरुआत में 66 विधायक थे, लेकिन ताजा परिस्थितियों ने इसे चुनौतीपूर्ण बना दिया है:
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राजेंद्र भारती (दतिया): आर्थिक अनियमितता मामले में सजा मिलने के बाद उनकी सदस्यता पर संकट है।
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मुकेश मल्होत्रा (विजयपुर): कोर्ट ने इनके वोट डालने पर रोक लगा रखी है।
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निर्मला सप्रे (बीना): तकनीकी रूप से कांग्रेस में हैं, लेकिन व्यवहारिक तौर पर भाजपा के साथ खड़ी हैं।
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वर्तमान स्थिति: कांग्रेस के पास अब प्रभावी रूप से केवल 62 वोट बचे हैं।
जीत का समीकरण और भाजपा की ‘प्लान-B’ रणनीति
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता है। कांग्रेस के पास फिलहाल कोटे से केवल 4 वोट अधिक हैं।
भाजपा की नजर तीसरी सीट पर: भाजपा के पास 164 वोट हैं। दो सीटें जीतने के बाद उनके पास 48 अतिरिक्त वोट बचेंगे। भाजपा को तीसरी सीट कब्जाने के लिए मात्र 10 और वोटों की दरकार है। रणनीति यह है कि यदि कांग्रेस के 4-5 विधायक भी ‘क्रॉस वोटिंग’ करते हैं, तो भाजपा दिग्विजय सिंह वाली सीट भी झटक सकती है।
किन नामों पर टिकी हैं निगाहें?
दिग्विजय सिंह का कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो रहा है और उनके दोबारा चुनाव लड़ने से इनकार के बाद कांग्रेस में खींचतान शुरू हो गई है:
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दिग्गज दावेदार: कमलनाथ और मीनाक्षी नटराजन के नामों की चर्चा।
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जातीय समीकरण: पार्टी के भीतर से ही किसी दलित या आदिवासी चेहरे को राज्यसभा भेजने की मांग उठ रही है।
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भाजपा के संपर्क में विधायक: चर्चा है कि कांग्रेस के 4-5 युवा और आदिवासी विधायक भाजपा के संपर्क में हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि:
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भाजपा राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए साम-दाम-दंड-भेद का इस्तेमाल कर रही है।
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विधायकों को खरीदने की कोशिश विफल होने पर पुराने मुकदमों को ‘हथियार’ बनाया जा रहा है।
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राजेंद्र भारती की 25 साल पुराने मामले में गिरफ्तारी और नरोत्तम मिश्रा के ‘पेड न्यूज’ मामले में देरी पर उन्होंने न्यायिक सवाल भी उठाए हैं।



