मध्य प्रदेश में 190 करोड रुपए की मुख्यमंत्री यंग इंटर्न फॉर गुड-गवर्नेंस प्रोग्राम को मंजूरी
-हितग्राहियों के जीवन में बदलाव की नब्ज टटोलेंगे युवा
-फिलहाल थाने, अस्पताल, पंचायत, आंगनबाड़ी जैसे सीधे जुड़ाव वाले कार्यालयों में भ्रष्टाचार से मुक्ति बड़ी चुनौती
भोपाल। रुद्र सिंह
मध्य प्रदेश में डॉक्टर मोहन यादव बतौर मुख्यमंत्री नई लकीर खींचने के लिए पिछले सवा दो साल के कार्यकाल में कई नवाचार कर चुके हैं, लेकिन हालात में प्रभावी बदलाव का इंतजार अभी भी है। अब नई उम्मीद 190 करोड़ रुपए की लागत वाले मुख्यमंत्री यंग इंटर्न फॉर गुड-गवर्नेंस प्रोग्राम से की जा सकती है, जिसमें युवा प्रदेश भर में विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों के जीवन में बदलाव की हकीकत टटोलेंगे। इसकी बड़ी कामयाबी तभी मानी जाएगी जब हितग्राही खुशहाल मिलें और सुशासन की कमजोर कड़ियों को दूर करने के प्रभावी प्रयास हों। ऐसे कार्यक्रम पहले भी अस्तित्व में रहे हैं और गहरी छाप छोड़ने में कामयाब नहीं रहे हैं।
दरअसल, गवर्नेंस दुरुस्त करने की कवायद में जनता तक पहुंचने के साथ इसकी ठोस शुरुआत उन सरकारी दफ्तरों से भी किया जाना जरूरी है, जहां नागरिक उम्मीद और फरियाद लेकर खुद चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं। पुलिस थाने, अस्पताल, नगर निगम, आंगनबाड़ी, पशु चिकित्सालय जैसे शासकीय कार्यालयों से नागरिकों को शासकीय सेवाओं से लाभ की सीधी अपेक्षा और सुविधाओं की दरकार होती है। लेकिन सरकारें बदलने से भी इन कार्यालयों की तस्वीर और संस्कृति जस की तस ही रही है। एक पखवाड़े पहले ही मंत्रालय के दफ्तरों में औचक निरीक्षण में मिलीं खाली कुर्सियां और केबिन खुद इसके गवाह रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने खुद चेतावनी दी है कि यदि अधिकारी, कर्मचारी अपने दफ्तरों में निर्धारित समय तक बैठकर काम नहीं कर सकते, तो सप्ताह के कार्य दिवस 5 से बढ़ाकर फिर से 6 दिन करने पर सरकार विचार कर सकती है। हालांकि ऐसी चेतावनी के बाद भी सरकारी दफ्तरों की तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है।
मुख्यमंत्री यादव ने पिछले साल राजस्व मामलों को बड़े पैमाने पर हल करने के लिए समाधान अभियान की शुरुआत की थी, जिसमें लाखों मामलों के निस्तारण से करोड़ों लोगों को राहत मिली थी। इस अभियान की सफलता से उत्साहित मोहन सरकार ने इस साल भी राजस्व मामलों के निपटारे के लिए 12 जनवरी से 31 मार्च तक संकल्प से समाधान अभियान की शुरुआत की है। मध्य प्रदेश में लाखों ऐसे किसान परिवार हैं, जो भूमि संबंधी समस्याओं से परेशान हैं और उनमें से बड़ी संख्या में किसानों को इस अभियान से फायदा हुआ है, लेकिन जितने मामले निपटाए जाते हैं, उसी अनुपात में नए मामले भी राजस्व न्यायालय में पहुंच रहे हैं। राजस्व न्यायालय की असली परेशानी यहां वर्षों तक मामलों का निपटारा न होना है। मोहन सरकार यदि राजस्व मामलों से जनता को न्यायसंगत राहत देना चाहती है, तो प्रत्येक स्तर पर एक निश्चित समय सीमा का निर्धारण करना होगा, जिससे राजस्व के मामले लंबे समय तक न अटके रहें।
इससे पहले की सरकारों का भी जोर सहज, सुलभ न्याय पर रहा है। जनसुनवाई जैसी पहल भी की गई। लाखों लोगों को इसका फायदा मिला, लेकिन समय के साथ यह भी सरकारी ढर्रे की भेंट चढ़ गई। अब मध्य प्रदेश में जनसुनवाई खानापूर्ति बन चुकी है। लोग मामले लेकर पहुंचते तो हैं, लेकिन संबंधित अधिकारियों की रुचि न होने से यह व्यवस्था भी रस्म अदायगी बन चुकी है। पीड़ित या शिकायतकर्ता को बड़े पैमाने पर राहत मिलती हो, ऐसा दिखाई नहीं देता। मुश्किल यह है कि जब भी सरकार अपनी छवि सुधारने के लिए ऐसे प्रयास करती है, तब यही कोशिशें उसकी छवि के खिलाफ जाने लगती हैं। जनसुनवाई में निस्तारण के लिए समय सीमा का तय न किया जाना सरकार की छवि को धूमिल कर रहा है। इस व्यवस्था में भी सरकार को कार्रवाई और मामले के निस्तारण के लिए समय सीमा का निर्धारण करना ही चाहिए।
कमोबेश यही स्थिति सीएम हेल्पलाइन की भी है, जहां शिकायतों की संख्या बढ़ रही है और जबरन क्लोजर रिपोर्ट लगाने से नागरिकों में इस व्यवस्था के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। समस्याओं के समाधान के बजाय क्लोजर लगाने की प्रवृत्ति सुशासन के मामले में आपराधिक कृत्य ही माना जाएगा। सरकार अपने प्रयासों और वादों के साथ कितनी भी घोषणाएं कर ले, लेकिन मैदानी स्तर पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के बिना यह सब प्रभावहीन तो साबित होगा ही, सरकार की छवि को भी खासा नुकसान होना तय है।
पुलिस का ही उदाहरण लें तो आमतौर पर जिन पुलिस कर्मियों पर आरोप लगते हैं, उन्हें भी मैदानी पदस्थापना से हटाने के नियम तय होने चाहिए। सरकार की तरफ से नागरिकों के प्रति सुविधा और शिकायतों की सुनवाई के लिए समय सीमा सुनिश्चित किया जाना, किसी भी नवाचार से अधिक जरूरी है। इसका सीधा लाभ भ्रष्टाचार से मुक्ति के रूप में भी मिल सकता है। फिलहाल मोहन सरकार ने मुख्यमंत्री यंग इंटर्न फॉर गुड-गवर्नेंस प्रोग्राम के लिए कमर कस ली है और उम्मीद भी की जा रही है की सरकार के नौजवान ब्रांड एंबेसडर शायद कुछ बदलाव लाने में सफल होंगे।



