भोपाल। 03 दिसंबर 2023
2018 में भाजपा को मिली थी पराजय
15वीं विधानसभा के लिए वर्ष 2018 में हुए चुनाव में भाजपा को पराजय मिली थी। तब कांग्रेस के 114, भाजपा के 109, बसपा के दो, सपा के एक और निर्दलीय चार सदस्य चुने गए थे। हालांकि, 15 महीने बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायकों के दल बदलने से भाजपा ने सरकार बना ली थी।
भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में शुरूआती दौर में मुकाबला तो बराबरी का दिख रहा था लेकिन कांग्रेस जिस भ्रष्टाचार और एंटी इन्कमबैंसी के भरोसे सत्ता में आने की राह देख रही थी, वह उसे भी मुद्दा नहीं बना पाई। भाजपा को विश्वास था कि चौथी बार सरकार वापसी में गरीब कल्याण और लाड़ली बहना जैसे मुद्दे उसके कारगर हथियार बने। जिस चुनाव को कांटे का मुकाबला बताया जा रहा था, वह भाजपा की सुनामी की तरह जीत में तब्दील हो गया। राम मंदिर का मुद्दा भी आया और चुनाव में छाया भी रहा। भाजपा कहीं न कहीं इस मुद्दे पर मतदाताओं को प्रभावित करने में सफल रही तो कांग्रेस ने इसे छीनने की कोशिश भी की। कांग्रेस ने कहा कि राम पर सभी देशवासियों का अधिकार है।
केंद्रीय मंत्री और 12 मंत्री हारे
चुनाव में भाजपा के केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, सांसद गणेश सिंह, मंत्री नरोत्तम मिश्रा, कमल पटेल, गौरीशंकर बिसेन, अरविंद भदौरिया, राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, भारत सिंह कुशवाह, प्रेम सिंह पटेल, महेंद्र सिंह सिसौदिया, रामकिशोर कांवरे, सुरेश धाकड़, राहुल लोधी, रामखेलावन पटेल सहित अन्य हार गए हैं। जबकि, कांग्रेस के दिग्गज नेता विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डा.गोविंद सिंह, केपी सिंह, सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी, लक्ष्मण सिंह, तरुण भनोत अन्य नेता हारे हैं।



