भोपाल : 28 जून, 2024 (प्योरपॉलीटिक्स)
गुरुवार देर रात जारी आईए एस अफसरों की तबादला सूची चर्चा का विषय बन गयी है। प्रशासनिक और राजनीतिक हल्कों में चर्चित है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जिन अफसरों को महत्वपूर्ण दायित्व दिए वह सब स्वच्छ छवि के कर्मठ अफसर हैं और इनमें कुछ अधिकारी वह भी हैं जिन्हें उनकी क्षमतानुसार काम करने का उतना मौका नही मिला था।
चुनाव के बाद पहली बार राजनीतिक जमावट नही बल्कि प्रशासनिक कसावट के लिए जिस तरह के फैसले लिए उसने बता दिया कि मुख्यमंत्री का प्रशासनिक जमावट में विज़न क्या है और उनके अनुभव पर कानाफूसी करने वालों की भी जबान बंद हो गई है ।
इस सूची में स्वच्छ छवि के अफसर 2002 बैच के एम सेल्वेंद्रम को उनके वर्तमान कार्य के साथ सरकार की प्राथमिकता वाले किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव का जिम्मा भी सौंपा गया है सेल्वेंद्र आईटी के माहिर भी हैं उन्होंने इस क्षेत्र में कई इनोवेशन भी किए हैं ,सचिव डॉ संजय गोयल को स्कूल शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गयी है।उनकी छवि ईमानदार व काम के प्रति ईमानदार अफसर की है। ऐसे ही सुदाम खाड़े को आयुक्त जनसंपर्क बनाया गया है । वह पहले भी जनसंपर्क आयुक्त रह चुके है लेकिन उन्हें खुल कर काम करने का अवसर नही मिला था । सरकार की उपलब्धियों व छवि को प्रचारित करने वाले इस विभाग को अब और गति मिलेगी। प्रमुख सचिव संदीप यादव पहले ही इस दिशा में मेहनत कर रहे थे इस दौर में उन्होंने चुनाव के दौर में भी काम किया और विभाग के कामकाज को गति दी ,अब खाड़े जैसा कर्मठ सहयोगी मिलने से काम में ओर गति आएगी । सरकार ने 2008 बैच के नेत्रहीन लेकिन कर्मठ अधिकारी को नर्मदापुरम जैसे महत्वपूर्ण संभाग की जिम्मेदारी देकर यह भी संदेश दिया है कि व्यक्ति की शारीरिक क्षमता नही उसके काम से जज किया जाएगा।ऐसे ही एक अफसर 2008 बैच के मनोज खत्री भी है। प्रमोटी अफसर है चुनाव आयोग में अच्छा काम किया। यह भी काम के प्रति ईमानदार है। यह पन्ना में कलेक्टर भी रह चुके है लेकिन काम नही कर सके थे कंग्रेस की कमलनाथ सरकार ने इन्हें हटा दिया था। अब इन्हें भी काम करने का मौका दिया गया है। नेत्रहीन आईएएस अफसर कृष्ण गोपाल तिवारी को नर्मदापुरम के आयुक्त जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गयी है। मुख्यमंत्री में उन्हें यह तबादला सूची में योग्य अफसरों को तरजीह दी है वही स्वतंत्र कुमार जैसे अफसरों को हटा कर मुख्यमंत्री ने संकेत दे दिए है कि उन्हें विवादित व दागी अफसरों का साथ सुशाशन में नही चाहिए।
मंत्रियों को इंकम टैक्स भरने के निर्णय के साथ शहीद सैनिकों के माता पिता को भी सरकारी सहायता राशि में भागीदारी देने , गौ रक्षा के लिए सड़कों में गायों को हटाने आदि जैसे अहम निर्णय के लिए के बाद इस प्रशासनिक सर्जरी से यही कहा जा सकता लिफाफा देखकर मजमून भांप लिया जाता है ।



