भोपाल : 5 दिसंबर , 2023 (प्योरपॉलीटिक्स)
मध्य प्रदेश विधानसभा में अब दागी ही दागी नजर आएंगे। इस बार के चुनाव में 230 सीटों में विजय हासिल करने वालों में 90 विजेता आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं। इनमें से 34 प्रत्याशियों पर गंभीर अपराध दर्ज है। यानी कुल विजेताओं में से 39 प्रतिशत अपराधी तो 15 प्रतिशत पर गंभीर अपराध दर्ज है। 2018 के चुनाव में 94 विधायकों ने अपराध और 47 विधायकों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए थे। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में विजेता उम्मीदवारों की आपराधिक और आर्थिक प़ृष्टभूमि पर आधारित यह रिपोर्ट एडीआर (एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म्स) ने जारी की है। उम्मीदवारों द्वारा निर्वाचन आयोग को सौंपें गए शपथ पत्र के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट में एडीआर का दावा है कि 230 विजेताओं में से 205 करोड़पति हैं और इनकी औसत संपत्ति 11.77 करोड़ रुपये है। 2018 में विधायकों की औसतन संपत्ति 10.17 करोड़ रुपये थी। पुन: निर्वाचित होने वाले 101 विधायकों की औसत संपत्ति में पांच वर्ष में 4.60 करोड़ (37 प्रतिशत) की वृद्धि हुई है।एक विजेता हत्या के मामले में आरोपित है। वहीं हत्या का प्रयास से संबंधित मामले में पांच और महिलाओं के ऊपर अत्याचार के मामले में तीन विजेता उम्मीदवार आरोपित हैं। दलवार आरोपित उम्मीदवारों की बात की जाए तो भाजपा के 163 में 51 (31 प्रतिशत), कांग्रेस के 66 में से 38 (58 प्रतिशत) और भारत आदिवासी पार्टी के एक विजेता ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। वहीं गंभीर अपराध के मामले में भाजपा के 16, कांग्रेस के 17 विजेता उम्मीदवार है।
सुरेंद्र पटवा 57 करोड़ तो भूपेंद्र सिंह 23 करोड़ के देनदार
भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा की कुल संपत्ति 66 करोड़ रुपये हैं और उन पर 57 करोड़ रुपये की देनदारी है। वहीं खुरई से भाजपा विधायक और मंत्री भूपेंद्र सिंह की कुल संपत्ति 84 करोड़ रुपये है, उन पर 23 करोड़ रुपये की देनदारी है। महीदपुर से कांग्रेस के विजेता उम्मीदवार दिनेश जैन बोस के पास नौ करोड़ रुपये की संपत्ति है और वे 30 करोड़ रुपये के देनदार है। भाजपा विधायक संजय पाठक की बिजनेस से अर्जित वार्षिक आय तीन करोड़ रुपये है। वहीं भूपेंद्र सिंह ने कृषि, दूध डेयरी, मैरिज गार्डन, होटल, आटोमोबाइल और पेट्रोल पंप से स्वयं पत्नी और आश्रित सहित चार करोड़ रुपये वार्षिक आय घोषित की है। इनमें स्वयं की आय 57 लाख रुपये बताई गई है। वहीं भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन की दो करोड़ रुपये सालाना आय है।
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले विजेता
– 2023 :
आपराधिक मामले — 90 (39 प्रतिशत)
गंभीर आपराधिक मामले– 34 (15 प्रतिशत)
– 2018 :
आपराधिक मामले — 94 (41 प्रतिशत)
गंभीर आपराधिक मामले– 47 (20 प्रतिशत)
89 प्रतिशत विजेता उम्मीदवार करोड़पति
205 यानी 89 प्रतिशत विजेता करोड़पति है। इन विजेता उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 11.77 करोड़ रुपये है। इनमें भाजपा के 144 और कांग्रेस के 61 विजेता उम्मीदवार की घोषित संपत्ति एक करोड़ से अधिक है। पांच करोड़ वाले 102, दो करोड़ से पांच करोड़ वाले 71, 50 लाख से दो करोड़ वाले 48 और 50 लाख से कम संपत्ति वाले नौ विजेता उम्मीदवार है। 2018 में 187 करोड़पति विधायक थे। भाजपा के विजेता उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 12.35 प्रतिशत और कांग्रेस के विजेताओं की संपत्ति 10.54 प्रतिशत करोड़ है। यानी कांग्रेस के विजेताओं की तुलना में भाजपा के विजेता करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या अधिक है। भारत आदिवासी पार्टी के एक विजेता की औसतन संपत्ति 18.32 लाख रुपये है।
अधिक संपत्ति वाले विजेता उम्मीदवार
विजेता उम्मीदवार– विस सीट– दल– कुल संपत्ति
चेतन्य कश्यप — रतलाम सिटी– भाजपा– 296 करोड़
संजय पाठक– विजयराघवगढ़– भाजपा — 242 करोड़
कमल नाथ– छिंदवाड़ा– कांग्रेस– 134 करोड़
भूपेंद्र सिंह– खुरई– भाजपा — 84 कराेड़
सुदेश राय– सीहोर– भाजपा– 74 करोड़
दिव्यराज सिंह– सिरमौर– भाजपा– 74 करोड़
सुरेंद्र पटवा– भोजपुर– भाजपा– 66 करोड़
जयवर्धन सिंह– राघोगढ़–कांग्रेस– 64 करोड़
गोलू शुक्ला– इंदौर-3– भाजपा–61 करोड़
डा. राजेंद्र कुमार सिंह– अमरपाटन– कांग्रेस– 44 करोड़
सबसे कम संपत्ति वाले विजेता उम्मीदवार
विजेता उम्मीदवार– विस सीट– दल– कुल संपत्ति
कमलेश्वर डोडियार– सैलाना (अजजा)– भारत आदिवासी पार्टी– 18 लाख
संतोष वरकड़े– सिहोरा (अजजा)– भाजपा– 25 लाख
कंचन मुकेश तन्वे– खंडवा (अजा)– 26 लाख
मधु भगत– परसवाड़ा– कांग्रेस– 31 लाख
रामसिया भारती– मलहरा– कांग्रेस 36 लाख
मुरली भवरा– बागली (अजजा)– भाजपा — 37 लाख
सरला विजेंद्र रावत– सबलगढ़– भाजपा 38 लाख
मोंटू सोलंकी– सेंधवा (अजजा)– कांग्रेस– 39 लाख
देवेंद्र रामनारायण सखवार– अम्बाह (अजा)– कांग्रेस– 39 लाख
इंजी. नरेंद्र प्रजापति– मनगवां (अजा)– भाजपा 53 लाख
64 विजेता उम्मीदवार पांचवीं से 12वीं पास, 161 हैं उच्च शिक्षित
230 विजेता उम्मीदवारों में से 64 विजेता पांचवीं से 12वीं पास हैं। वहीं 161 यानी 70 प्रतिशत विजेता स्नातक और इससे अधिक उच्च शिक्षक हैं। तीन डिप्लोमा धारक और दो विजेता उम्मीदवार साक्षर हैं। विजेता उम्मीदवारों में 71 की आयु 31 से 50 वर्ष के बीच है जबकि 159 की आयु 51 से 80 वर्ष के बीच है। महिला प्रतिनिधित्व में 27 यानी 12 प्रतिशत महिला विजेता उम्मीदवार हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में 21 महिला विधायक थीं।



