भोपाल : 26 जनवरी, 2024 (प्योरपॉलीटिक्स)
– 2019 में भाजपा को 58, तो कांग्रेस को 34.8 फीसदी वोट मिले थे
– भाजपा को बड़ी छलांग की उम्मीदें
मध्य प्रदेश में राम लहर और मोदी मैजिक से निपटना कांग्रेस के लिए नामुमकिन जैसा हो गया है। जल्द होने वाले लोकसभा चुनाव में अयोध्या राम मंदिर से बड़ा मुद्दा फिलहाल कोई नहीं है, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की बिखरती एकता भाजपा की राह ज्यादा आसान बना रही है। राम लहर और मोदी मैजिक के चलते मध्य प्रदेश में भाजपा वोट शेयरिंग का रिकॉर्ड स्थापित करने की उम्मीदें बांधे हुए हैं, वहीं कांग्रेस प्रभावी चेहरे के अभाव के बीच अपना वोट बैंक बचाने की चुनौती का सामना कर रही है।
2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर देते हुए कांग्रेस ने सरकार बनाई, फिर भी 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस (34.8) का वोट शेयर भाजपा (58) के मुकाबले काफी कम रहा और 29 में से एकमात्र कांग्रेस छिंदवाड़ा की लोकसभा सीट बचा सकी थी। हालिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने न्यूनतम स्तर पर 66 सीट (40.4) चली गई, जबकि भाजपा ने 163 सीटों (48.55) पर जीत दर्ज कर सरकार बरकरार रखी। ऐसे में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की वापसी का कोई मजबूत आधार दिखाई नहीं दे रहा है।
अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रदेश सहित पूरे देश में राम लहर का असर है, ऐसे में स्वाभाविक तौर पर भाजपा को मध्य प्रदेश में भी लाभ मिलेगा। भाजपा इसे पार्टी की सफलता के बजाय राष्ट्रवाद से जोड़कर जनता के सामने रख रही है। इस मुद्दे पर कांग्रेस पहले ही अयोध्या निमंत्रण का प्रस्ताव ठुकरा कर हिंदू वर्ग के बीच नाराजगी झेल चुकी है।
फिलहाल मप्र में भाजपा के पास लोकसभा की 29 में से 28 सीटें हैं। पार्टी अब नया रिकार्ड बनाकर सभी 29 की 29 सीटें जीतना चाहती है। नए मतदाताओं से संपर्क के साथ राम लहर और मोदी मैजिक को लेकर भाजपा की टीमें ग्राउंड पर उतर चुकी हैं, जबकि कांग्रेस में सांगठनिक बदलाव के बाद कोई तैयारी नहीं दिखाई पड़ रही है। कांग्रेस हाईकमान को युवा चेहरों से उम्मीद है, लेकिन वरिष्ठ नेताओं का साथ न मिलने से जीतू पटवारी और उमंग सिंघार जैसे युवा नेतृत्व भी अभी सही दिशा में कदम नहीं बढ़ा सके हैं।
भाजपा ने 17 वर्ष मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान के स्थान पर नए नेतृत्व को बढ़ाते हुए डा. मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया। यादव खुद ओबीसी हैं, इसलिए उनके सामने सिर्फ शिवराज की छवि के अलावा कोई अन्य चुनौती भी नहीं है। मोहन यादव की कार्यशैली में प्रशासनिक कसावट का जो संदेश नागरिकों के बीच जा रहा है, वह नई सरकार के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत कर रहा है।



