भोपाल : 13 जनवरी, 2024 (प्योरपॉलीटिक्स)
विद्याभारती के प्रांतीय समिति समागम ‘संकल्प दृष्टि 2024’ का शुभारंभ
विद्या भारती मध्यभारत प्रांत के प्रांतीय समिति समागम ‘संकल्प दृष्टि 2024’ का शुभारंभ शनिवार को सरस्वती विद्या मंदिर, शारदा विहार में हुआ। उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के महामंत्री अवनीश भटनागर थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के सह संगठन मंत्री यतीन्द्र शर्मा, विशिष्ट अतिथि विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के सह संगठन मंत्री श्रीराम जी आरावकर, विशेष अतिथि विद्या भारती मध्यभारत प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री निखिलेश महेश्वरी एवं प्रांत अध्यक्ष मोहन लाल गुप्ता थे। समारोह की अध्यक्षता विद्या भारती मध्यक्षेत्र के अध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने की। तीन दिवसीय इस समागम में पूरे प्रांत की विद्यायलय संचालित करने वाली 180 समितियों के 1500 से अधिक दायित्ववान कार्यकर्ता सम्मिलित हुए हैं। समिति समागम का समापन आज रविवार को होगा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के महामंत्री अवनीश भटनागर ने अपने प्रभावी उद्बोधन में कहा कि हम एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं। समाज में शिक्षा को लेकर विद्याभारती के अपने लक्ष्य हैं। शिक्षित, सुसंस्कारित, राष्ट्रीय विचारों से ओतप्रोत पीढ़ी के निर्माण का हमारा जो संकल्प है, उसे लेकर हमारी दृष्टि स्प्ष्ट होनी चाहिए। यह अपने वैचारिक अधिष्ठा्न के शाश्वत मूल्यों पर चलने के संकल्प लेने का समय है। हमने समाज परिवर्तन का आधार शिक्षा को माना है। इसके लिए शिक्षा को माध्यम बनाया है। अपने लिए विचार करने का विषय यह है कि क्या हमारे लक्ष्य के अनुरूप नई पीढ़ी को तैयार किया जा रहा है? वंचित वर्ग को सुसंस्कृत और संपन्न बनाने की कोई योजना के साथ हमें कार्य करना चाहिए। विद्यालयों में भैया-बहिनों का शैक्षणिक, मानसिक एवं शारीरिक विकास हो इसकी चिंता एवं इस दिशा में कार्य आवश्यक है। आज समाज की आवश्यकताएं कुछ अलग हो गई हैं। अब विद्यालय अति सुविधाजनक हो गए हैं पर विद्यालयों में क्या संस्कार दिए जा रहे हैं जबकि साधन से अधिक संस्कार आवश्यक हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अभिभावकों का प्रबोधन भी आवश्यक है।

भटनागर ने कहा कि हम अपने लक्ष्य के अनुरूप वर्तमान सामाजिक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने वाली राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत युवा पीढ़ी का निर्माण करने का संकल्प लें। हम किसी भी काल और परिस्थिति के संक्रमण में नये भविष्य की रचना करेंगे। आज की नई परिस्थितियों में भौतिक संसाधन की उपलब्धता बहुत आवश्यक है किन्तु साधनों का उपयोग करने के लिए अच्छे साधक और शिक्षाविदों की आवश्यकता है। प्रथम सरस्वती शिशु मंदिर की स्था्पना के 75 वर्ष 2027 में पूरे होने जा रहे हैं। हम संकल्प लेकर व्यवस्थाएं जुटाने का लक्ष्य लें। हमारे विद्यालयों में कम्प्यूटर लैब, प्रयोगशालाएं, डिजीटल कक्षाएं, पुस्तकालय आदि विकसित हों। विद्यालयों में कौशल विकास, स्किल डवलपमेंट की व्यवस्था उन्नत रूप में करें। हमारे विद्यालय के परीक्षा परिणाम अन्य विद्यालय से अच्छे हो। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में विद्यार्थी चयनित होकर उच्च स्थान प्राप्त करें ऐसे विषयों पर समिति चर्चा करे, समीक्षा करें और योजना बनाएं।

उन्होंनें कहा कि हमारी शिशु वाटिका (प्री प्राइमरी) प्रभावी बनाने के लिए विद्या भारती के 12 आयामों का प्रभावी क्रियान्वन हो। हमारे विद्यालय का समाज के सभी वर्ग मातृशक्ति, युवा, जनजातीय समाज से जुड़ाव हो, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की दृष्टि से खासकर, ई.सी.सी.ई. जो कि फाउण्डेशन स्टेज है, इसके लिए संसाधन और प्रशिक्षित आचार्यो की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए प्रादेशिक सचिव शिरोमणि दुबे ने कहा कि यह ‘संकल्प दृष्टि 2024’ कार्यक्रम मध्यभारत प्रांत का तीन दिवसीय अनूठा समागम है। इसमें विद्या भारती मध्यभारत प्रांत के 180 विद्यालयों के समिति सदस्य एवं शिक्षाविद एवं प्राचार्य सम्मिलित होकर विभिन्न सत्रों के अलग-अलग विषयों पर एक नया संकल्प और दृष्टि लेकर जायेंगे।

मुख्य अतिथि विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान सह संगठन मंत्री यतीन्द्र शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम शिक्षा की दिशा बदलेंगे, समाज में परिवर्तन लायेंगे और एक नवीन वैचारिक क्रांति लायेंगे। इसी संकल्प के साथ विद्या भारती का प्रथम विद्यालय 1952 में गोरखपुर में प्रारंभ हुआ। प्रारंभिक समय के कार्यकर्ताओं के समर्पण और साधना के कारण आज हम यहां तक पहुंचे है। प्रारंभिक अवस्था में साधनविहीन व्यवस्थाओं में भी कार्यकर्ताओं ने प्रभावी ढंग से कार्य किया और आज मध्यक्षेत्र ही नहीं पूरे भारतवर्ष में विद्या भारती शिक्षा के क्षेत्र में एक वैचारिक अनुष्ठान के साथ सफलतापूर्वक विद्यालयों का संचालन कर रही है। प्रारंभिक समय में साधन कम थे लेकिन साधना पूर्ण थी। आज भी ऐसी ही साधना की आवश्यकता हम सभी कार्यकर्ताओं को है। आज जनजातीय क्षेत्र वंचित बस्तियों सहित ग्रामीण नगरीय क्षेत्रों में मध्यभारत प्रांत का विद्या भारती का कार्य सबसे अधिक प्रभावी है। यह हमारी पूर्ण साधना के भाव से किये गये तप का प्रतिफल है। हमारे धैयनिष्ठ कार्यकर्ताआंे ने अनेक सामाजिक कुरीतियों और विषमताओं को दूर करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया है।
कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों का स्वागत सुधीर दाते, चंद्रहंस पाठक एवं मुकेश राजपूत ने किया। कार्यक्रम का संचालन आशीष जोशी ने किया। व्यक्तिगत गीत मधुर शर्मा ने प्रस्तुत किया। समारोह में विद्याभारती के क्षेत्र संगठन मंत्री भालचन्द्र रावले, डॉ राजश्री वैद्य, विवेक शेण्ड्ये, डॉ आनन्द राव, अनिल अग्रवाल, शशिकांत फडके, निरंजन शर्मा भी उपस्थित थे।

दो दिन में हो रहे हैं चर्चा एवं बौद्धिक सत्र
तीन दिवसीय इस समिति समागम के अब इन दो दिनों में 8 सत्र हो रहे हैं। इनमें 2 बौद्धिक सत्र, 5 बौद्धिक सत्र और एक सांस्कृतिक संध्या में रंगमंचीय सत्र भी हो रहे हैं। बौद्धिक सत्रों में विद्याभारती के अखिल भारतीय अधिकारी एवं देश के प्रख्यात शिक्षाविद कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं। कार्यक्रम स्थसल पर डिजीटल प्रदर्शनी लगाई गई है। पुस्तकों का स्टाल भी लगाया गया है।
प्लास्टिक मुक्त है पूरा परिसर
कार्यक्रम के लिए दो हजार लोगों की बैठक क्षमता वाला एक विशाल डोम पांडाल बनाया गया है। इसके साथ ही पांच और पांडाल बनाए गए हैं। सभी कार्यकर्ताओं को 6 समूहों में बांटा गया है। इनके लिए इन्हीं पांडाल में सत्र आयोजित हो रहे हैं। मंच, प्रदर्शनी एवं अन्यो सभी व्यवस्था ओं को प्लायस्टिक मुक्त रखा गया है।
मंच पर श्री राम मंदिर की झांकी, दीवार पर रामलीला के दृश्य
समारोह के मुख्य पांडाल नैमिषारण्य सभागृह के मंच के पार्श्व में अयोध्या के श्रीराम मंदिर की प्रतिकृति बनाई गई है। इसमें प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया है, इसके स्थान पर कागज और गत्ते का उपयोग किया गया है। वहीं विद्यालय की बाउंड्रीवॉल पर रामायण के दृश्य अंकित किए गए हैं। इसकी वॉल पेंटिंग शारदा विहार के विद्यार्थियों द्वारा की गई है।
कार्यकर्ताओं में सभी श्रेणी के लोग
विद्यालयों को संचालित करने वाली समितियों में सभी कार्य क्षेत्रों के कार्यकर्ता सम्मिलित होते हैं। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर, व्यवसायी शासकीय अधिकारी-कर्मचारी, मातृशक्ति, युवा, अभिभाषक, कलाकार, सीए आदि सभी श्रेणियों के कार्यकर्ता होते हैं। समिति के ये कार्यकर्ता इस समागम में सम्मिलित हुए हैं।



