मुरैना | 16 अप्रैल, 2026
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर प्रशासन ने अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाए जाने के ठीक दो दिन बाद, मुरैना जिला प्रशासन ने चंबल नदी से रेत निकालने और उसके परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
प्रभारी कलेक्टर कमलेश कुमार भार्गव की अध्यक्षता में हुई टास्क फोर्स की बैठक में लिए गए ये निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
अवैध खनन पर ‘सशस्त्र’ पहरा
प्रशासन ने रेत माफियाओं के नेटवर्क को तोड़ने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात किया है:
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SAF की तैनाती: राजघाट, भानु, देवड़ा और स्कर्दा नहर तिराहे जैसे संवेदनशील बिंदुओं पर मध्य प्रदेश विशेष सशस्त्र बल (SAF) के जवान 24 घंटे तैनात रहेंगे।
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कड़ी निगरानी: पुलिस, खनिज और वन विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से इन क्षेत्रों की मॉनिटरिंग करेंगे।
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जब्ती और नीलामी: अवैध गतिविधियों में लिप्त वाहनों को न केवल जब्त किया जाएगा, बल्कि उनके त्वरित निराकरण और नीलामी की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
बिना नंबर वाले वाहनों पर ‘नो फ्यूल’ पॉलिसी
जिले में अपराध और अवैध परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने एक अनोखा आदेश जारी किया है:
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अब किसी भी पेट्रोल पंप पर बिना पंजीकरण (Unregistered) वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं दी जाएगी।
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यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि अवैध खनन में अक्सर बिना नंबर वाले वाहनों का उपयोग होता है, जिससे अपराध के बाद उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
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यह आदेश 15 अप्रैल से 14 जून तक प्रभावी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जताई थी नाराजगी?
बता दें कि 13 अप्रैल को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार को ‘विफलता’ का दोषी मानते हुए तीखी टिप्पणी की थी। अदालत ने दो मुख्य घटनाओं पर गहरी चिंता जताई थी:
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वनरक्षक की हत्या: रेत माफियाओं द्वारा एक वनकर्मी की निर्मम हत्या।
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पुल की सुरक्षा को खतरा: राजस्थान को जोड़ने वाले चंबल पुल की बुनियाद के पास हो रहे अवैध खनन की तस्वीरों को देखकर पीठ ने कहा था, “वे पुल की खुदाई कर रहे हैं, अगर पुल गिर गया तो कौन जिम्मेदार होगा?”
अदालत ने सख्त लहजे में कहा था कि या तो राज्य सरकार अवैध खनन रोकने में अक्षम है या फिर अधिकारियों की माफियाओं के साथ मिलीभगत है।
प्रशासनिक कार्रवाई का संदेश
प्रभारी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक समीर सौरभ ने स्वयं चिन्हित स्थानों का निरीक्षण कर परिचालन रणनीति की समीक्षा की। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि चंबल के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने वालों के खिलाफ अब कोई ढील नहीं बरती जाएगी।
“चंबल नदी से किसी भी स्थिति में रेत उत्खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी। सशस्त्र बल उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।” — कमलेश कुमार भार्गव, प्रभारी कलेक्टर



