हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: ‘उदन्त मार्त्तण्ड’ ने तय किया था राष्ट्रवाद का नैरेटिव, भोपाल में पत्रकारों का महामंथन

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भोपाल। आज के राजनीतिक ध्रुवीकरण और डिजिटल सूचना युद्ध के दौर में जहाँ ‘नैरेटिव’ (विमर्श) का महत्व सर्वोपरि हो गया है, वहीं हिंदी पत्रकारिता के पहले समाचार पत्र ‘उदन्त मार्त्तण्ड’ ने दो शताब्दी पूर्व ही अपनी दिशा तय कर दी थी। पंडित युगलकिशोर शुक्ल ने 200 वर्ष पहले अपनी पहली ही पंक्ति “हिंदुस्तानियों के हित के हेत” लिखकर सदियों के लिए पत्रकारिता का राष्ट्रवादी नैरेटिव स्थापित किया था। इसी ऐतिहासिक यात्रा का जश्न मनाने के लिए राजधानी भोपाल के भारत भवन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय समारोह ‘प्रणाम उदन्त मार्त्तण्ड’ (8 से 10 मई 2026) का भव्य आयोजन किया जा रहा है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) और वीर भारत न्यास की इस संयुक्त पहल में देश के दिग्गज संपादक, विचारक और युवा पत्रकार ‘नेशन फर्स्ट’ (राष्ट्र प्रथम) और एआई (AI) जैसी आधुनिक चुनौतियों पर गहन मंथन कर रहे हैं।

‘हिंदुस्तानियों के हित के हेत’: पत्रकारिता का मूल मंत्र

कार्यक्रम के विशेष सत्र ‘उत्तिष्ठ भारत’ में अयोध्या स्थित हनुमत निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि पत्रकार कोई भविष्यवक्ता या मात्र पोस्टमार्टम करने वाला डॉक्टर नहीं है, बल्कि वह समाज का ‘निष्प्रिय और तत्वज्ञ वैद्य’ है जो देश की नाड़ी पहचानता है। उन्होंने कहा कि ‘उदन्त’ (समाचार) और ‘मार्त्तण्ड’ (सूर्य) का शाब्दिक अर्थ ही है समाज को जगाना। जिस तरह सूर्योदय के बिना लोग नहीं जागते, उसी तरह ‘अखंड भारत’ के भाव से शुरू हुआ यह पत्र सोए हुए समाज को जगाने का माध्यम बना। पत्रकारिता सत्ता या विपक्ष का झंडा उठाने के लिए नहीं, बल्कि सत्व की रक्षा करने के लिए है।

परिवार: मनुष्य निर्माण की सबसे बड़ी प्रयोगशाला

आधुनिक समाज में टूटते मूल्यों पर चिंता व्यक्त करते हुए आचार्य जी ने कहा कि हमारे पास डॉक्टर और इंजीनियर बनाने के संस्थान तो हैं, लेकिन मनुष्य बनाने का एकमात्र संस्थान ‘परिवार’ है, जिसे हमने कमजोर कर दिया है। बाजारवाद ने हमारे जीवन मूल्यों और संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सफलता के लिए सिद्धांतों को छोड़ने की भ्रांति से युवाओं को बाहर आना होगा।

‘प्रेम और भोग’ के अंतर को राम-सीता के प्रसंग से समझाते हुए उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने धर्म और ग्रंथों को फिल्मों या टीवी सीरियल्स के चश्मे से न देखें, बल्कि मूल ग्रंथों का अध्ययन करें। युवा होने का अर्थ केवल मूंछें आना नहीं है, बल्कि अपनी ऊर्जा और ‘आग’ को संभालने की शक्ति विकसित करना है।

एआई (AI) और डीपफेक: आधुनिक दौर का मायावी ‘स्वर्ण मृग’

विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने तकनीकी खतरों पर बेबाक टिप्पणी की। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक को आधुनिक युग का ‘स्वर्ण मृग’ (मायावी सोने का हिरण) करार दिया। उन्होंने युवा पत्रकारों को चेतावनी दी कि त्रेता युग में तो इस मृग के पीछे जाने का सुखांत हो गया था, लेकिन कलयुग में यदि वे इस मायावी जाल में फँसे, तो 14 साल का ‘वनवास’ कोर्ट-कचहरी और मानहानि के चक्करों में ही बीत जाएगा।

नेशन फर्स्ट: मिशनरी पत्रकारिता से राष्ट्रीय ध्रुवीकरण तक

वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में पत्रकारिता की भूमिका पर भारत सरकार के पूर्व सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने गहरी बात रखी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से पूर्व पत्रकारिता एक मिशन थी। आज के वैचारिक रूप से बंटे हुए दौर में पत्रकारों को लेफ्ट या राइट (वामपंथ या दक्षिणपंथ) की विचारधारा से ऊपर उठकर ‘नेशन फर्स्ट’ के सिद्धांत पर काम करना चाहिए। भारत 2037 तक आर्थिक और सामरिक महाशक्ति बन जाएगा, लेकिन क्या हम सांस्कृतिक रूप से वहां होंगे जहाँ हमें होना चाहिए? इसके लिए पत्रकारों को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना होगा।

वहीं वरिष्ठ संपादक विष्णु प्रकाश त्रिपाठी और राजेन्द्र शर्मा ने स्वामी विवेकानंद के ‘उत्तिष्ठ भारत’ के आह्वान का स्मरण कराते हुए मानवीय मूल्यों की रक्षा करने और एक मजबूत हिंदू समाज के निर्माण पर जोर दिया।

दक्षिण भारत का ऐतिहासिक योगदान

दक्षिण भारत के बिना हिंदी पत्रकारिता का इतिहास अधूरा है। लेखक एवं प्राध्यापक डॉ. सी. जयशंकर बाबू ने ऐतिहासिक तथ्य सामने रखे कि 1950 के दशक में तमिलनाडु सरकार भी हिंदी का समाचार पत्र प्रकाशित करती थी। 18वीं सदी के केरल और 1906 में सुब्रमण्यम भारती के तमिल अखबार में हिंदी समाचारों के प्रकाशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत ने ‘राम कार्य’ की भावना के साथ हिंदी की सेवा की है।

डिजिटल युग और नए प्रकाशन

कार्यक्रम में ‘डिजिटल समय में टीवी पत्रकारिता’ विषय पर वरिष्ठ टीवी पत्रकारों (प्रवीण दुबे, बृजेश राजपूत, सुधीर दीक्षित आदि) ने माना कि डिजिटल दौर में चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन टीवी की प्रासंगिकता और आकर्षण आज भी बरकरार है। इस भव्य आयोजन में मीडिया जगत को समृद्ध करने वाली कई पुस्तकों और पत्रिकाओं का लोकार्पण भी किया गया:

  • ‘माखन के लाल’: पूर्व विद्यार्थियों के अनुभवों का संकलन।

  • कार्टून कथा: 9 कार्टूनिस्टों की शानदार कॉफी टेबल बुक।

  • प्रणाम उदन्त मार्त्तण्ड: कुलगुरु संपादकीय टीम द्वारा तैयार विशेष समाचार पत्र।

  • अभ्युदय: अंग्रेजी पत्रकारिता के विद्यार्थियों द्वारा संपादित न्यूज़ मैगजीन।

  • पहल: ईरान, इजराइल और अमेरिका के भू-राजनीतिक तनाव पर केंद्रित प्रायोगिक समाचार पत्र।

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Saket Singh
Saket Singhhttp://purepolitics.in
MBA in Media Management from Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication, Bhopal

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