जिनेवा में गूंजा भारत का डंका: अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में शोभा करंदलाजे ने पेश की देश के ऐतिहासिक श्रम सुधारों की मिसाल
नई दिल्ली/जिनेवा; 18 जून, 2026: स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित 114वें अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन (ILC) के पूर्ण सत्र में भारत ने अपनी मजबूत आर्थिक और सामाजिक नीतियों का लोहा मनवाया है। सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार तथा एमएसएमई राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने भारत के श्रम सुधारों, सामाजिक सुरक्षा के अभूतपूर्व विस्तार और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की सफलता को वैश्विक मंच पर रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के नए कानून ‘अंत्योदय’ के विचार से प्रेरित हैं, जो देश के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े श्रमिक को भी सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा की गारंटी देते हैं।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
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वैश्विक मंच पर नेतृत्व: केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने जिनेवा में 114वें अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन को संबोधित कर भारत का विज़न रखा।
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बेरोजगारी दर में भारी गिरावट: देश में बेरोजगारी दर 2017 के 6% से घटकर 2025 में मात्र 3.1% के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गई है।
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महिलाओं की भागीदारी बढ़ी: कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी 22% (2017) से बढ़कर अब 38.8% (2025) हो गई है।
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सामाजिक सुरक्षा का सुरक्षा कवच: भारत में सामाजिक सुरक्षा का दायरा 2015 के 19% से बढ़कर 2025 में 64.3% हो गया है, जिससे 940 मिलियन से अधिक लोग कवर हुए हैं।
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वैश्विक स्तर पर युवाओं का हुनर: युवाओं की रोजगार क्षमता (Employability) 2014 के 34% के मुकाबले 2025 में बढ़कर 56% से अधिक हो चुकी है।
अंत्योदय से आत्मनिर्भरता: 29 केंद्रीय कानूनों को मिलाकर बनीं 4 श्रम संहिताएं
केंद्रीय राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने अपने संबोधन में ‘भारत के नए श्रम कानूनों पर वैश्विक संवाद’ विषय को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने दशकों पुराने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को मिलाकर 4 सरल और प्रभावी श्रम संहिताओं (Labour Codes) का निर्माण किया है।
“ये सुधार न केवल कागजी अनुपालन और नियमों को सरल बनाते हैं, बल्कि श्रमिकों के कल्याण को मजबूत करके एक आधुनिक, पारदर्शी और न्यायसंगत श्रम प्रणाली का निर्माण भी करते हैं।” — सुश्री शोभा करंदलाजे, केंद्रीय राज्य मंत्री
इन नए सुधारों के जरिए देश के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के साथ-साथ गिग (Gig) और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी पहली बार कानूनी तौर पर सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम मजदूरी के दायरे में लाया गया है। इसके अलावा कार्यस्थलों पर व्यावसायिक सुरक्षा (Occupational Safety) और लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं।
ई-श्रम और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की वैश्विक स्तर पर सराहना
भारत में डिजिटल तकनीकों ने श्रम क्षेत्र की तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने भारत के ‘ई-श्रम पोर्टल’ और ‘राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल’ (NCS) की सफलताओं को दुनिया के सामने साझा किया। इन पोर्टलों ने न केवल देश के करोड़ों असंगठित श्रमिकों का एक प्रामाणिक डेटाबेस तैयार किया है, बल्कि कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को सीधे कामगारों के मोबाइल तक पहुँचाया है।
श्रम और रोजगार क्षेत्र में भारत के इस बेहतरीन डिजिटल मॉडल की अन्य देशों ने भी सराहना की। द्विपक्षीय बैठकों के दौरान रवांडा की लोक सेवा एवं श्रम मंत्री क्रिस्टीन नकुलिकियिंका और श्रीलंका के श्रम मंत्री अनिल जयंत फर्नांडो ने भारत के इन डिजिटल संसाधनों और श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन के अनुभवों को जानने में गहरी रुचि दिखाई। भारत ने इन विकासशील देशों को तकनीकी और क्षमता निर्माण सहायता देने की पेशकश भी की है।
आईओएल (ILO) महानिदेशक ने की भारत की तारीफ, सामाजिक सुरक्षा में रिकॉर्ड वृद्धि
जिनेवा प्रवास के दौरान सुश्री शोभा करंदलाजे ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के महानिदेशक श्री गिल्बर्ट एफ. होंगबो के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में आईएलओ के महानिदेशक ने इतने कम समय में भारत द्वारा सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर हासिल की गई प्रगति की मुक्त कंठ से सराहना की।
भारत में जहाँ साल 2015 में केवल 19 प्रतिशत आबादी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में थी, वहीं सरकार के कल्याणकारी प्रयासों के चलते साल 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 64.3 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसके परिणामस्वरूप देश के करीब 94 करोड़ से ज्यादा नागरिकों को सीधे सामाजिक सुरक्षा नेट से जोड़ दिया गया है, जिसे वैश्विक संस्थाओं ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना है।
निष्कर्ष (Conclusion)
जिनेवा में शोभा करंदलाजे का यह संबोधन और वैश्विक नेताओं के साथ हुई बैठकें यह साबित करती हैं कि भारत अब श्रम सुधारों और कल्याणकारी नीतियों के मामले में दुनिया का मार्गदर्शन कर रहा है। ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’, ई-श्रम और युवाओं के कौशल विकास को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने के प्रयासों ने भारतीय श्रम बाजार को भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार कर दिया है। ये नीतियां न केवल भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाएंगी, बल्कि देश के करोड़ों कामगारों के जीवन स्तर को भी वैश्विक स्तर पर सम्मानजनक स्थान दिलाएंगी।



