एसएचई-बॉक्स 2.0: कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा के लिए सरकार का बड़ा कदम

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कार्यस्थल पर महिलाएं अब और सुरक्षित: केंद्र सरकार ने ‘एसएचई-बॉक्स 2.0’ से मजबूत किया डिजिटल सुरक्षा कवच

नई दिल्ली; 19 जून, 2026: देश के कामकाजी कार्यबल में महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने अपने डिजिटल गवर्नेंस ढांचे को और अधिक सशक्त कर दिया है। महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के प्रमुख कार्यक्रम ‘मिशन शक्ति’ के तहत एसएचई-बॉक्स 2.0 (SHE-Box 2.0) पोर्टल ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के क्रियान्वयन को अत्यधिक मजबूत, पारदर्शी और जवाबदेह बना दिया है। यह अत्याधुनिक तकनीक से लैस सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म संगठित, असंगठित, सार्वजनिक और निजी सभी क्षेत्रों की महिलाओं को बिना किसी डर के शिकायत दर्ज करने और उसकी निगरानी करने की अनूठी सुविधा देता है।

  • एकल-खिड़की सुविधा: सार्वजनिक, निजी, संगठित और असंगठित सभी क्षेत्रों की कामकाजी महिलाओं के लिए एकीकृत और केंद्रीकृत शिकायत पोर्टल।

  • 22 भाषाओं में उपलब्धता: भारत की भाषाई विविधता को देखते हुए पोर्टल को हिंदी और अंग्रेजी सहित कुल 22 आधिकारिक भाषाओं में सुलभ बनाया गया है।

  • विकेंद्रीकृत निगरानी: पारदर्शी गवर्नेंस के लिए अब राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों को इस डिजिटल निगरानी प्रणाली से सीधे जोड़ा गया है।

  • गोपनीयता की पूर्ण गारंटी: महिलाओं की पहचान सुरक्षित रखने और प्रतिशोध या बदनामी के डर को खत्म करने के लिए बेहद सुरक्षित और उपयोगकर्ता के अनुकूल (User-friendly) इंटरफेस।

  • आंतरिक समितियों का डिजिटल भंडार: केंद्रीय, राज्य, जिला कार्यालयों और निजी कंपनियों की आंतरिक समितियों (IC) और जिला स्तर की स्थानीय समितियों (LC) का एक व्यापक रिपोजिटरी (डेटाबेस) तैयार किया गया है।

तकनीकी अपग्रेड और विकेंद्रीकृत गवर्नेंस: क्यों खास है नया संस्करण?

पहले के पुराने शिकायत तंत्र के मुकाबले, एसएचई-बॉक्स 2.0 वर्तमान कार्यस्थल इकोसिस्टम के बढ़ते पैमाने और जटिलताओं को सुलझाने के लिए कहीं अधिक व्यापक और सुरक्षित है। सरकार द्वारा 29 अगस्त 2024 को लॉन्च किए गए इस अपडेटेड प्लेटफॉर्म में अब शिकायत दर्ज करने के बाद उसकी वास्तविक समय (Real-time monitoring) में प्रगति पर नजर रखने का विकल्प दिया गया है। इससे विभिन्न हितधारकों के बीच निर्बाध समन्वय स्थापित करने में मदद मिल रही है और मामलों के लटकने की संभावना समाप्त हो गई है।

सुरक्षित कार्यस्थल न केवल आर्थिक सशक्तिकरण के लिए आवश्यक हैं, बल्कि महिलाओं की कार्यबल में निरंतर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भी सबसे पहली शर्त हैं। इस पोर्टल का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब जिला स्तर पर ‘स्थानीय समितियों’ (LC) को भी इसके सुदृढ़ नेटवर्क में शामिल कर लिया गया है। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीण और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाली घरेलू या दिहाड़ी महिला श्रमिकों को भी सीधा कानूनी और तकनीकी संरक्षण मिल सकेगा, जिससे वे बिना किसी संकोच के अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा सकेंगी।

निष्कर्ष

पिछले 12 वर्षों (2014-2026) में महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, समावेशी और सशक्त इकोसिस्टम बनाने की दिशा में सरकार ने कई ऐतिहासिक और संरचनात्मक नीतिगत कदम उठाए हैं। ‘मिशन शक्ति’ के अंतर्गत लाया गया यह एसएचई-बॉक्स 2.0 पोर्टल डिजिटल गवर्नेंस का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह न केवल कार्यस्थलों पर किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को जमीन पर उतारता है, बल्कि देश की आधी आबादी को एक सुरक्षित, गरिमापूर्ण और आत्मनिर्भर भविष्य का भरोसा भी देता है।

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Saket Singh
Saket Singhhttp://purepolitics.in
MBA in Media Management from Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication, Bhopal

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