नक्सल मुक्त भारत 2026: वामपंथी उग्रवाद पर ऐतिहासिक जीत, जानें पूरी रणनीति

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नक्सल मुक्त भारत: वामपंथी उग्रवाद पर ऐतिहासिक जीत और शांति के नए युग का उदय

31 मार्च 2026 का दिन भारत के आंतरिक सुरक्षा इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बन गया है। लगभग छह दशकों तक देश के कई हिस्सों—विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों—में खौफ का पर्याय रहे वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) से भारत ने प्रभावी रूप से मुक्ति पा ली है। यह रातों-रात हुआ कोई चमत्कार नहीं है, बल्कि पिछले 12 वर्षों (2014-2026) के निरंतर प्रयासों, दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और एक व्यापक “संपूर्ण सरकार” (Whole of Government) दृष्टिकोण का परिणाम है।

इस ऐतिहासिक परिवर्तन की रूपरेखा तीन मजबूत स्तंभों— ‘विश्वास’ (Trust), ‘निर्माण’ (Infrastructure), और ‘जन कल्याण’ (Public Welfare) पर टिकी थी। यह लेख इस बात का विस्तृत विश्लेषण करता है कि कैसे एक बिखरी हुई नीति से एकीकृत रणनीति की ओर बढ़ते हुए भारत ने इस जटिल चुनौती को मात दी।

1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1967 से ‘रेड कॉरिडोर’ तक का सफर

वामपंथी उग्रवाद की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी विद्रोह से हुई थी। माओवादी विचारधारा और “सत्ता बंदूक की नली से निकलती है” के हिंसक सिद्धांत से प्रेरित इस आंदोलन ने धीरे-धीरे भारत के एक बड़े हिस्से को अपने चंगुल में ले लिया। 2004 में कई उग्रवादी गुटों के विलय से भाकपा (माओवादी) का गठन हुआ, जिसने इसे देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बना दिया।

2004 से 2014 का दौर सबसे हिंसक रहा:

  • हिंसा का चरम (2010): केवल एक वर्ष में 1,936 हिंसक घटनाएं हुईं और 720 नागरिकों की जान गई।

  • दशक का आंकड़ा: इस पूरे दशक में 17,542 हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 1,913 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और 5,019 निर्दोष नागरिकों की जान गई।

  • उस समय ‘रेड कॉरिडोर’ का भौगोलिक विस्तार कश्मीर और पूर्वोत्तर की सुरक्षा चुनौतियों से भी कहीं अधिक व्यापक था, लेकिन इससे निपटने के लिए कोई सुसंगत राष्ट्रीय नीति नहीं थी।

2. नीतिगत बदलाव: ‘विश्वास’ से सुरक्षा और शांति की बहाली

मई 2014 के बाद सरकार ने स्थिति को केवल ‘प्रबंधित’ करने के बजाय समस्या को जड़ से खत्म करने का निर्णय लिया। 2015 में राष्ट्रीय नीति एवं कार्य योजना को मंजूरी दी गई, जिसने संवाद, सुरक्षा और समन्वय की त्रि-आयामी रणनीति को जन्म दिया।

मजबूत सुरक्षा ढाँचा और प्रौद्योगिकी का उपयोग

सरकार ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद ‘सुरक्षा शून्यता’ (Security Vacuum) को भरने के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए:

  • थानों का सुदृढ़ीकरण: 2014 से पहले जहां मात्र 66 चाक-चौबंद पुलिस थाने थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 597 हो गई है।

  • नई छावनियां: घने जंगलों और दूरस्थ क्षेत्रों में वर्चस्व कायम करने के लिए पिछले 7 वर्षों में 408 नए CAPF (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) शिविर स्थापित किए गए।

  • विशेष बलों का एकीकरण: कोबरा (COBRA), डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG), झारखंड जैगुआर और आंध्र प्रदेश के ग्रेहाउंड्स जैसे विशिष्ट बलों को मिलाकर एक अभेद्य सुरक्षा ग्रिड तैयार किया गया।

  • आधुनिक तकनीक: अभियानों में ड्रोन, मानवरहित हवाई वाहन (UAV), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा एनालिटिक्स और 68 नाइट-लैंडिंग हेलीपैड का इस्तेमाल गेम-चेंजर साबित हुआ।

“ट्रेस, टारगेट, न्यूट्रलाइज़” रणनीति

सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट, ऑपरेशन ऑक्टोपस, ऑपरेशन डबल बुल और ऑपरेशन चक्रबंधा जैसे सघन अभियान चलाए। ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ में 30 से अधिक माओवादी मारे गए, जिससे नक्सलियों की कमर टूट गई। वहीं ‘ऑपरेशन डबल बुल’ ने गुमला और लातेहार जैसे जिलों को पूरी तरह नक्सल मुक्त कर दिया।

फंडिंग नेटवर्क पर प्रहार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नक्सलियों की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी। दिसंबर 2025 तक 52 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क की गईं और 100 से अधिक मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई।

3. ‘निर्माण’ – नए और सशक्त भविष्य की बुनियाद

सुरक्षा अभियानों ने जो जगह खाली की, उसे विकास कार्यों से भरा गया। लक्ष्य यह था कि जो सुविधाएं महानगरों में हैं, वे दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों तक भी पहुंचें।

‘निर्माण’ स्तंभ के तहत हासिल की गई प्रमुख उपलब्धियां:

क्षेत्र विकास कार्य / उपलब्धियां (2014 – 2026) प्रभाव
सड़क संपर्क 12,249 किमी से अधिक सड़कों का निर्माण (कुल 17,319 किमी स्वीकृत)। दूरदराज के गांव मुख्य बाजारों और स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े।
डिजिटल कनेक्टिविटी 9,600+ मोबाइल टावर स्थापित। 96% नक्सल प्रभावित गांवों में नेटवर्क। शिक्षा, ऑनलाइन सेवाओं और सूचना तक निर्बाध पहुंच।
वित्तीय समावेशन 1,804 नई बैंक शाखाएं, 1,321 ATM, और 6,025 डाकघर खोले गए। जनजातीय आबादी मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जुड़ी।
शिक्षा व कौशल 259 एकलव्य स्कूल (EMRS) स्वीकृत, 46 ITI और 49 कौशल केंद्र स्थापित। 90,000 युवाओं को प्रशिक्षण; रोजगार के नए अवसर सृजित।

4. ‘जन कल्याण’ – गरिमा, पुनर्वास और विकास

नक्सलवाद के खात्मे का मतलब सिर्फ गोलियों का जवाब देना नहीं था, बल्कि भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना भी था। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया: “जो लोग हथियार डालते हैं, उनके लिए रेड कार्पेट बिछाया जाएगा।”

  • आकर्षक आत्मसमर्पण नीति: शीर्ष नक्सलियों को 5 लाख रुपये और अन्य को 2.5 लाख रुपये की तत्काल सहायता दी गई। इसके साथ ही 36 महीनों तक 10,000 रुपये प्रति माह का वजीफा, कौशल प्रशिक्षण और बच्चों को 12वीं तक मुफ्त शिक्षा सुनिश्चित की गई।

  • परिणाम: इस नीति की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल 2025 में 2,337 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और 2024 से मार्च 2026 के बीच कुल 3,927 नक्सली मुख्यधारा में लौट आए।

  • जनजातीय योजनाएं: पीएम-जनमन (PM-JANMAN) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान ने कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) को पक्के आवास, साफ पानी और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर उनके जीवन स्तर को उठाया।

5. केस स्टडी: छत्तीसगढ़ (बस्तर) की परिवर्तनकारी यात्रा

छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग दशकों तक नक्सलवाद का सबसे खूंखार गढ़ रहा। लेकिन पिछले 12 वर्षों की रणनीति ने यहां की तस्वीर बदल दी:

  1. बस्तरिया बटालियन: 2017 में गठित इस बटालियन में 1,143 स्थानीय युवाओं (दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर से) को भर्ती किया गया। इससे पुलिस और जनता के बीच का अविश्वास खत्म हुआ।

  2. शहीद वीर गुंडा धुर सेवा डेरा: मई 2026 में शुरू की गई इस अनोखी पहल के तहत बस्तर के 70 CAPF शिविरों को “सेवा केंद्रों” में बदला जा रहा है। ये केंद्र अब बंदूक की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं, बैंकिंग और कृषि सहायता की नुमाइंदगी कर रहे हैं।

  3. सांस्कृतिक पुनर्जागरण: ‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजनों ने लाखों स्थानीय युवाओं को मंच प्रदान कर उन्हें विकास का भागीदार बनाया।

6. एक दशक के परिवर्तन के ठोस आंकड़े

आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि कैसे एक खतरनाक चुनौती को व्यवस्था और दृढ़ संकल्प से समाप्त किया गया:

मापदंड वर्ष 2010/2014 की स्थिति वर्ष 2025/2026 की स्थिति सुधार
प्रभावित जिले 126 जिले (2014) 2 जिले (2026) भारी कमी
अति-प्रभावित जिले 35 जिले (2014) शून्य (0) पूर्णतः मुक्त
हिंसक घटनाएं 1,936 (2010) / 870 (2014) 234 (2025) 85%+ की गिरावट
मृतकों की संख्या 720+ (2010) / 310 (2014) 100 (2025) निरंतर और बड़ी गिरावट

निष्कर्ष

31 मार्च 2026 को हासिल की गई ‘नक्सल मुक्त भारत’ की उपलब्धि स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा सफलताओं में से एक है। यह केवल एक उग्रवादी आंदोलन का अंत नहीं है; यह लाखों जनजातीय चेहरों पर लौटी मुस्कान, बिना डर के स्कूल जाते बच्चों और विकास की मुख्यधारा से जुड़ते सुदूर गांवों की कहानी है।

भारत ने साबित कर दिया है कि जब सुरक्षा बलों की बहादुरी, जनोन्मुखी नीतियां (विकास) और समावेशी प्रशासन एक साथ काम करते हैं, तो छह दशक पुरानी हिंसा को भी हमेशा के लिए शांत किया जा सकता है। यह नई शुरुआत भारत के सबसे कमजोर समुदायों के लिए शांति और प्रगति का एक स्वर्णिम अध्याय है।

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Saket Singh
Saket Singhhttp://purepolitics.in
MBA in Media Management from Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication, Bhopal

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