ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027: भोपाल में सजेगा महामंच, सीएम मोहन यादव ने उद्योगों को दी ₹1500 करोड़ की बड़ी सौगात
भोपाल: मध्य प्रदेश को औद्योगिक और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बेहद बड़ा ऐलान किया है। राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में ‘विश्व एमएसएमई दिवस’ के उपलक्ष्य में आयोजित “सशक्त उद्यमी : समृद्ध मध्यप्रदेश” समिट को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 का आयोजन भोपाल में किया जाएगा। इस भव्य औद्योगिक महाकुंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करने का निर्णय भी राज्य सरकार द्वारा लिया गया है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के औद्योगिक विकास की रफ्तार को दोगुना करने के लिए सिंगल क्लिक के माध्यम से उद्योगों और स्टार्ट-अप्स को कुल 1500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
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बड़ा ऐलान: भोपाल में आगामी वर्ष 2027 में ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ का भव्य आयोजन किया जाएगा।
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₹1500 करोड़ की सहायता: एमएसएमई इकाइयों को ₹225.19 करोड़, स्टार्ट-अप्स को ₹1.5 करोड़ और बड़े उद्योगों को निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत ₹1274 करोड़ जारी किए गए।
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सभी देनदारियां क्लियर: मध्य प्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य बन गया है, जिसने मई 2026 तक की सभी औद्योगिक देनदारियों का भुगतान कर दिया है।
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अर्थव्यवस्था का इंजन: मध्य प्रदेश में वर्तमान में 25 लाख एमएसएमई इकाइयां सक्रिय हैं, जो लगभग 1.5 करोड़ लोगों को रोजगार दे रही हैं।
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नारी शक्ति की हिस्सेदारी: राज्य के एमएसएमई सेक्टर में वर्ष 2024 से 2026 के बीच महिलाओं का प्रतिनिधित्व 67% बढ़ा है, और 4.41 लाख से अधिक इकाइयों की कमान महिलाओं के हाथ में है।
मध्य प्रदेश बना देश का सबसे बड़ा ‘इंडस्ट्री प्रोमोटिंग स्टेट’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत एमएसएमई सेक्टर में ग्लोबल चैंपियन बनने की ओर अग्रसर है। मध्य प्रदेश भी केंद्र सरकार के इसी विजन के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। राज्य में एमएसएमई क्षेत्र का विनिर्माण उत्पादन में 35 प्रतिशत और निर्यात में 49 प्रतिशत का योगदान है, जो इसे राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य इंजन बनाता है।
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि पिछले दो वर्षों में मध्य प्रदेश सरकार ने 18 नई औद्योगिक नीतियां और नियम लागू किए हैं, जिससे निवेशकों के लिए व्यापार करना बेहद सरल हो गया है। इसी का परिणाम है कि कनाडा, यूके, अमेरिका, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से राज्य के कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और मेडिकल डिवाइस क्षेत्रों में भारी विदेशी निवेश आ रहा है। भोपाल में आयोजित हुई पिछली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 के बाद अब तक 9,300 करोड़ रुपये का निवेश सीधे तौर पर धरातल पर उतर चुका है।
नियमों में बड़े सुधार और किसानों के लिए ऐतिहासिक सौगात
समिट के दौरान एमएसएमई मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप और मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने भी राज्य में व्यापार की सुगमता (Ease of Doing Business) पर विशेष जोर दिया। मुख्य सचिव ने बताया कि सरकार ने सैकड़ों अनुपयोगी कानूनों को खत्म कर दिया है और लगभग 100 कानूनों में जेल भेजने के प्रावधान को हटाकर केवल अर्थदंड की व्यवस्था की है। इसके अतिरिक्त, एमएसएमई विभाग का बजट भी ₹1100 करोड़ से बढ़ाकर ₹3100 करोड़ कर दिया गया है।
कृषक कल्याण वर्ष 2026 की सौगात: मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026 को राज्य में ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत कपास पर मंडी शुल्क को आधा कर दिया गया है। साथ ही, किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण देने के नियमों को बदलते हुए 31 मार्च की समय-सीमा की बाध्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अब किसान जिस तारीख को कर्ज लेंगे, उन्हें चुकाने के लिए पूरे 12 महीने का समय मिलेगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
भोपाल में आयोजित “सशक्त उद्यमी : समृद्ध मध्यप्रदेश” समिट और मुख्यमंत्री द्वारा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 की समय पूर्व घोषणा यह साबित करती है कि मध्य प्रदेश अब औद्योगिक सुधारों को लागू करने में देश का ‘टॉप अचीवर’ बन चुका है। समय पर ₹1500 करोड़ की देनदारियों का भुगतान करना और नीतियों को पारदर्शी बनाना यह दर्शाता है कि राज्य सरकार गरीब, किसान, युवा और नारी शक्ति के साथ-साथ प्रदेश के व्यापार जगत को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।



