एससीओ विमेन्स फोरम 2026: बिश्केक में भारत की हुंकार, महिला-नेतृत्व वाले विकास के प्रति दोहराई प्रतिबद्धता
किर्गिज़ गणराज्य के बिश्केक में आयोजित एससीओ विमेन्स फोरम 2026 में भारत ने महिला सशक्तिकरण और उनके आर्थिक नेतृत्व को लेकर वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री, श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने आज इस प्रतिष्ठित मंच को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के पारस्परिक सम्मान, समानता और सर्वसम्मति के सिद्धांतों के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को एक बार फिर रेखांकित किया।
मुख्य बिंदु
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महिला-नेतृत्व वाला विकास: भारत ने स्पष्ट किया कि महिलाएं अब विकास की केवल लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि वे देश की आर्थिक उन्नति की सबसे सशक्त प्रेरक शक्ति बन चुकी हैं।
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लखपति दीदी की सफलता: देश में लगभग 10 करोड़ महिलाएं 90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी हुई हैं, जिनमें से 30 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
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प्रमुख सरकारी नीतियां: महिलाओं की सुरक्षा, देखभाल और आर्थिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ‘मिशन शक्ति’ और ‘मिशन पोषण 2.0’ को प्रमुख स्तंभ के रूप में प्रस्तुत किया गया।
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वैश्विक सहयोग की पेशकश: भारत ने एससीओ के अन्य साझेदार देशों के साथ महिलाओं के आर्थिक कल्याण और नेतृत्व को आगे बढ़ाने के लिए अपने जमीनी अनुभवों को साझा करने की तत्परता जताई।
विकसित भारत @2047 और आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका
‘आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका’ विषय पर आयोजित पैनल सत्र में भारत का उद्घाटन वक्तव्य और प्रारंभिक टिप्पणी प्रस्तुत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने दूरदर्शी विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए महिला-नेतृत्व वाला विकास (Women-Led Development) ही देश की मुख्य परिकल्पना का मूल आधार है।
श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि भारत में जमीनी स्तर पर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करोड़ों महिलाओं और लाखों ‘लखपति दीदियों’ की सफलता की कहानियां इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि जब महिलाओं को समान अवसर मिलते हैं, तो वे पूरे समाज की आर्थिक व्यवस्था को बदल देती हैं।
इसके साथ ही, उन्होंने संगठन के साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और विभिन्न सदस्य देशों के बीच आपसी रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने पर बल दिया। भारत ने एससीओ क्षेत्र में महिलाओं के समग्र उत्थान और सशक्तिकरण के लिए हर संभव सहयोग देने की अपनी बात दोहराई।
निष्कर्ष
एससीओ विमेन्स फोरम 2026 में भारत का यह संबोधन दर्शाता है कि देश के घरेलू महिला सशक्तिकरण मॉडल्स (जैसे मिशन शक्ति और लखपति दीदी योजना) को अब वैश्विक स्तर पर एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। बिश्केक के इस मंच से भारत ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य का वैश्विक आर्थिक ढांचा महिलाओं की सक्रिय और सशक्त भागीदारी के बिना अधूरा है।



