नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0: मध्य प्रदेश में नशामुक्त समाज के लिए महाअभियान, 15 जुलाई से शुरू होगा जनआंदोलन
भोपाल: मध्य प्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार और प्रदेश पुलिस ने एक बड़े जनआंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है। प्रदेशभर में आगामी 15 से 30 जुलाई तक व्यापक जनजागरूकता अभियान नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0 संचालित किया जाएगा। इस राज्यव्यापी अभियान को प्रभावी और सर्वव्यापी स्वरूप देने के लिए भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) में पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री कैलाश मकवाणा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में गृह विभाग सहित सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और श्रम विभाग के आला अधिकारियों ने हिस्सा लिया और अभियान को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए एक संयुक्त कार्ययोजना (Joint Action Plan) को अंतिम रूप दिया। 15 जुलाई को भोपाल के रवीन्द्र भवन में मुख्यमंत्री द्वारा इस महाअभियान का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा।
मुख्य बिंदु
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15 दिवसीय महाअभियान: ‘नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0’ अभियान 15 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक पूरे मध्य प्रदेश में एक साथ चलाया जाएगा।
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होल-ऑफ-गवर्नमेंट अप्रोच: अभियान को केवल पुलिस तक सीमित न रखकर शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत और श्रम जैसे कई प्रमुख सरकारी विभागों के साथ मिलकर ‘साझा मंच’ पर संचालित किया जाएगा।
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कड़ा प्रवर्तन: अभियान के तहत प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों (स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी) के 500 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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विशाल नेटवर्क: सामाजिक न्याय विभाग के 12 हजार से अधिक प्रशिक्षित स्वयंसेवक और 500 मास्टर ट्रेनर्स इस अभियान को डिजिटल और जमीनी स्तर पर गति देंगे।
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नागरिक सहभागिता: ग्राम रक्षा समितियों, नगर सुरक्षा समितियों और कम्युनिटी पुलिसिंग नेटवर्क को जोड़कर इसे वास्तविक जनआंदोलन का रूप दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के विजन को आगे बढ़ा रही एमपी पुलिस
बैठक को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने कहा कि “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” केवल पुलिस विभाग की रूटीन गतिविधि नहीं है, बल्कि यह समाज के अंतिम छोर तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाने का एक पवित्र संकल्प है। उन्होंने नवंबर 2025 में रायपुर में आयोजित डीजीपी/आईजीपी सम्मेलन का स्मरण करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नारकोटिक्स के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और नशा छोड़ चुके लोगों की प्रेरक कहानियों (Inspirational Stories) को समाज के सामने लाने पर विशेष जोर दिया था। मध्य प्रदेश पुलिस इसी विजन को ध्यान में रखकर इस वर्ष अभियान का दायरा और अधिक व्यापक कर रही है।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नारकोटिक्स) श्री डी. श्रीनिवास वर्मा ने इस दौरान 15 दिवसीय अभियान का दिवसवार कैलेंडर प्रस्तुत किया। अभियान के तहत पूरे राज्य में नशा विरोधी शपथ, रैलियां, मानव श्रृंखला, नुक्कड़ नाटक, शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन, पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। विशेष रूप से छात्रावासों, खेल अकादमियों और मलिन बस्तियों में सघन जागरूकता कार्यक्रम होंगे।
विभिन्न विभागों ने संभाली जिम्मेदारी: ग्राम सभा से लेकर खेल मैदान तक
अभियान को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने के लिए सभी प्रमुख विभागों ने अपनी-अपनी विस्तृत रणनीतियां साझा की हैं:
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स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग: तकनीकी और उच्च शिक्षा विभाग इंजीनियरिंग कॉलेजों और आईटीआई में ‘ड्रग-फ्री कैंपस’ अभियान चलाएगा। वहीं, स्वास्थ्य विभाग अपने जमीनी नेटवर्क (आशा कार्यकर्ताओं और वेलनेस सेंटर्स) के माध्यम से नशा मुक्ति क्लीनिकों का प्रचार करेगा।
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खेल एवं श्रम विभाग: खेल विभाग प्रदेश के प्रतिष्ठित खिलाड़ियों के वीडियो संदेशों के जरिए युवाओं को प्रेरित करेगा, जबकि श्रम विभाग औद्योगिक क्षेत्रों और श्रमिक संगठनों के बीच जाकर मजदूरों को जागरूक करेगा।
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पंचायत एवं ग्रामीण विकास: गांवों में ग्राम सभाओं और महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) के जरिए इस अभियान को सीधे ग्रामीण परिवेश से जोड़ा जाएगा। सभी गतिविधियों की प्रविष्टि केंद्र सरकार के ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ पोर्टल पर भी की जाएगी।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश पुलिस का “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” अभियान युवाओं को नशे की गर्त से बचाने और राज्य में सुरक्षित सामाजिक वातावरण निर्मित करने की दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम है। विभागों के इस अभूतपूर्व समन्वय और ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण से स्पष्ट है कि सरकार इस बार नारकोटिक्स के अवैध कारोबार और मांग दोनों पर एक साथ कड़ा प्रहार करने जा रही है। समाज, सोशल मीडिया और सरकारी तंत्र का यह साझा प्रयास मध्य प्रदेश को पूरी तरह नशामुक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।



