प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: फसल नुकसान क्लेम में देरी पर लगेगा 12% जुर्माना, केंद्र सरकार ने सख्त किए नियम
नई दिल्ली: देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) के तहत अब फसल नुकसान के दावों के भुगतान में देरी होने पर बीमा कंपनियों और राज्य सरकारों पर 12% की दर से जुर्माना लगाया जाएगा।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP), डिजिक्लेम (DigiClaim) मॉड्यूल और ‘क्लैप’ (CLAP) ऐप जैसे तकनीकी सुधारों के जरिए क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और समयबद्ध बना दिया है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
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12% स्वतः जुर्माना: खरीफ 2024 से यदि बीमा कंपनियां क्लेम भुगतान में देरी करती हैं, तो राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल के जरिए स्वतः 12% जुर्माना लागू किया जाएगा।
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राज्य की देरी पर भी जुर्माना: खरीफ 2025 से यदि राज्य सरकारें अपने हिस्से की प्रीमियम सब्सिडी में देरी करती हैं, तो उन पर भी 12% जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।
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एस्क्रो खाता (ESCROW Account) अनिवार्य: खरीफ 2025 से वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए राज्यों हेतु अपने प्रीमियम हिस्से का अग्रिम जमा करने के लिए एस्क्रो खाता खोलना mandatory कर दिया गया है।
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डिजिक्लेम और क्लैप ऐप: दावों के सीधे और पारदर्शी भुगतान के लिए डिजिक्लेम मॉड्यूल और स्थानीय आपदाओं/फसलोपरांत नुकसान के सटीक आकलन के लिए ‘CLAP’ ऐप का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।
कैसे होता है फसल नुकसान का आकलन?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) मुख्य रूप से ‘क्षेत्रगत दृष्टिकोण (Area Approach)’ पर कार्य करती है। इसमें राज्य सरकारों द्वारा प्रस्तुत फसल कटाई प्रयोग (CCE) तथा ‘यस-टेक’ (YES-TECH) के रिमोट सेंसिंग आधारित आंकड़ों की तुलना ‘थ्रेशहोल्ड यील्ड’ से की जाती है।
हालांकि, ओलावृष्टि, भूस्खलन, जलप्लावन, बादल फटने या प्राकृतिक आग जैसे स्थानीयकृत जोखिमों और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं से फसल कटाई के बाद हुए नुकसान का आकलन व्यक्तिगत बीमित खेत के आधार पर होता है। इसके लिए राज्य सरकार और बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति तय समय-सीमा के भीतर सर्वे करती है।
फसल नुकसान आकलन प्रक्रिया
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क्षेत्रगत दृष्टिकोण (Area Approach) स्थानीयकृत जोखिम (Localized Calamities)
• CCE और YES-TECH तकनीक पर आधारित • ओलावृष्टि, जलप्लावन, बादल फटना आदि
• थ्रेशहोल्ड यील्ड से तुलना • व्यक्तिगत खेत के आधार पर सर्वे (CLAP App)
SDRF/NDRF और फसल बीमा में अंतर
कृषि राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत दी जाने वाली इनपुट सब्सिडी का आकलन केवल 33% या उससे अधिक फसल नुकसान की स्थिति में ही किया जाता है। यह जिला स्तर पर नियमित फसल नुकसान आकलन नहीं है, इसलिए इसकी तुलना PMFBY के तहत निपटाए गए बीमा दावों से नहीं की जा सकती।
पारदर्शी भुगतान प्रणाली: डिजिक्लेम और डिजिटल मॉनिटरिंग
केंद्र सरकार ने किसानों के खातों में क्लेम राशि का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सुनिश्चित करने के लिए डिजिक्लेम मॉड्यूल शुरू किया है। इसे सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (PFMS) और बीमा कंपनियों के सॉफ्टवेयर से जोड़ा गया है।
इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने अपने प्रीमियम सब्सिडी हिस्से को राज्यों के हिस्से से अलग कर दिया है ताकि राज्य सरकार की देरी के बावजूद किसानों को केंद्र के हिस्से का आनुपातिक भुगतान समय पर मिल सके।
निष्कर्ष (Conclusion)
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किए गए ये तकनीकी और नीतिगत बदलाव भारतीय कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम हैं। 12% जुर्माने के सख्त प्रावधान से बीमा कंपनियों की जवाबदेही तय होगी और किसानों को उनकी क्षतिग्रस्त फसलों का क्लेम समय पर सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त हो सकेगा।



