ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक: गुरुग्राम में भारत का वैश्विक नेतृत्व, ‘स्मार्ट ग्रिड’ के लिए डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र का शुभारंभ
गुरुग्राम: भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए हरियाणा के गुरुग्राम में 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। “स्थिति से दृढ़ता से उबरने, नवाचार, सहयोग और संवहनीयता के लिए निर्माण” विषय पर आधारित इस उच्च स्तरीय बैठक में वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों, सुरक्षा और नवाचार पर गहन विचार-विमर्श किया गया। बैठक का समापन सभी सदस्य देशों की आम सहमति से बने 11वें ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों के संयुक्त विज्ञप्ति (Joint Communiqué) को अपनाने के साथ हुआ, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक और तकनीकी साख को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु
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डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र की शुरुआत: स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ‘ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र’ (brics-dcoe.global) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया।
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ऊर्जा क्षेत्र में भारत का दबदबा: केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने रेखांकित किया कि भारत लगभग 540 गीगावाट विद्युत क्षमता के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बिजली उत्पादक और उपभोक्ता बन गया है।
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स्वच्छ ऊर्जा में ऐतिहासिक उछाल: देश की सौर ऊर्जा क्षमता साल 2014 के 3 गीगावाट से बढ़कर अब 154 गीगावाट से अधिक हो चुकी है।
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लक्ष्य 2047: भारत ने साल 2032 तक 400 गीगावाट घंटे से अधिक ऊर्जा भंडारण और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
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वैश्विक सहभागिता: बैठक में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA) और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
‘सर्वेषां ऊर्जम्’ (सभी के लिए ऊर्जा) के तीन स्तंभ
केंद्रीय विद्युत एवं आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए ऊर्जा सबसे मूलभूत आवश्यकता है। भारत की यह पहल “सर्वेषां ऊर्जाम्” यानी सभी के लिए सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा की उपलब्धता के सिद्धांत पर आधारित है। इस बैठक में मुख्य रूप से तीन प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:
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ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता: विविध ऊर्जा स्रोतों, महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला, ग्रिड आधुनिकीकरण और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का विकास।
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ऊर्जा पहुंच और समानता: विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए किफायती वित्तपोषण, क्षमतावर्द्धन और खाना पकाने के स्वच्छ समाधान तक सार्वभौमिक पहुंच।
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प्रौद्योगिकी और नवाचार: स्मार्ट ग्रिड, हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला (उत्पादन से वितरण तक), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग और कार्बन कैप्चर प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना।
भारत की बड़ी उपलब्धियां और भावी परिणाम
भारत की अध्यक्षता में इस बार ब्रिक्स ऊर्जा अनुसंधान सहयोग प्लेटफॉर्म (ERCP) के तहत कई बड़े नीतिगत निर्णय लिए गए। ‘स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण पर ब्रिक्स मार्गदर्शक सिद्धांतों’ को सर्वसम्मति से अपनाया गया, जो डिजिटल रूप से सक्षम विद्युत प्रणालियों के महत्व को मजबूत करेगा।
इसके अलावा, ‘हाइड्रोजन वैल्यू चेन 2026’ पर ब्रिक्स देशों की संयुक्त रिपोर्ट को अंतिम रूप देने की सराहना की गई। भारत ने स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी और विद्युत उपकरण मानकों को बढ़ाने के लिए दो विशेष सह-कार्यक्रमों का भी आयोजन किया। भविष्य की ऊर्जा प्रणालियों में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ब्रिक्स देशों ने ‘ब्रिक्स युवा ऊर्जा शिखर सम्मेलन’ के आयोजन का भी पूरा समर्थन किया है।
निष्कर्ष
11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को ही नहीं बदल रहा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) का नेतृत्व भी कर रहा है। ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ जैसी नागरिक-केंद्रित पहलों से लेकर परमाणु और सौर ऊर्जा के बड़े लक्ष्यों तक, भारत का यह मॉडल ब्रिक्स देशों के लिए प्रेरणा बना है। वर्ष 2027 में चीन की आगामी अध्यक्षता से पहले भारत ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल नवाचार की एक मजबूत और सुरक्षित रूपरेखा तैयार कर दी है।



