इंदौर- नरसिंहपुर कांग्रेस मुक्त, दिग्गजों को लड़ाने का नतीजा

Date:

भोपाल। 03 दिसंबर 2023

-कैलाश विजयवर्गीय के कारण इंदौर की सभी सीटें भाजपा ने जीती
-सांसद राकेश सिंह के विधानसभा चुनाव लड़ने से भाजपा सात में छह सीटें जीती
– केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने नरसिंहपुर को कांग्रेस मुक्त कर दिया
– केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से ग्वालियर-चंबल में भाजपा ने पाई बड़ी सफलता

भोपाल।
भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को चुनाव लड़ाया तो उसका लाभ भी पार्टी को मिला। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सेको दिमनी से विधानसभा चुनाव लड़ाए जाने का परिणाम यह हुआ कि ग्वालियर-चंबल में भाजपा ने बड़ी सफलता पाई। पिछले चुनाव की तुलना में उसकी सीट बढ़ गईं। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने नरसिंहपुर को कांग्रेस मुक्त कर दिया। सांसद राकेश सिंह के विधानसभा चुनाव लड़ने से भाजपा सात में छह सीटें जीती। कैलाश विजयवर्गीय के कारण इंदौर की सभी सीटें भाजपा ने जीत ली।
केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते भले ही चुनाव हार गए लेकिन आसपास की आदिवासी सीटों पर भाजपा को लाभ मिला। सांसद गणेश सिंह की पराजय ने भी विंध्य में भाजपा को सहारा दिया।
केंद्रीय मंत्रियों का रहा अपनी सीट के साथ आस-पास भी प्रभाव महाकोशल और विंध्य अंचल से दो केंद्रीय मंत्रियों सहित छह सांसदों को भाजपा ने विधानसभा चुनाव में अपना प्रत्याशी बनाया था जिनमें से केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते और सतना सांसद की पराजय हुई लेकिन बाकी सांसदों ने अपनी सीट में जीत हासिल करने के साथ-साथ अपने अंचल की अन्य सीटों में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने भूमिका निभाई। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के गृह जिले नरसिंहपुर जिले की चारों विधानसभा सीट भाजपा के खाते में गई हैं। पहली बार प्रहलाद पटेल खुद नरसिंहपुर विधानसभा से जीते हैं। उनकी मौजूदी और प्रचार-प्रसार के कारण कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली गोटेगांव और तेंदूखेड़ा में भाजपा की जीत निश्चित हुई। प्रहलाद पटेल भाजपा के स्टार प्रचारकों में शामिल रहे और उन्होंने प्रदेश की कई सीटों पर अपना प्रभाव छोड़ा। जबलपुर सांसद राकेश सिंह का प्रभाव जबलपुर की सात सीटों पर दिखा भाजपा ने नगर की तीन सीटें कांग्रेस से छीन ली हैं। एक सीट छोड़कर भाजपा ने छह सीट जीत ली।
————-
इंदौर के आसपास की सीटों को भी विजयवर्गीय से मिल गई संजीवनी
भाजपा की बड़े नेताओं को विधानसभा चुनाव लड़वाने की रणनीति बेहद कारगार
साबित हुई। राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को दस वर्ष बाद दोबारा
प्रदेश की राजनीति में सक्रिय करते हुए भाजपा ने इंदौर के विधानसभा क्षेत्र
क्रमाकं एक में प्रत्याशी बनाया थे। विजयवर्गीय ने एक नंबर सहित इंदौर की
सभी नौ विधानसभा सीटों के चुनाव की कमान अपनी टीम को सौप दी और
मालवा-निमाड़ क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए लगातार सभाएं और रोड़ शो
किए। टिकट वितरण से नाराज दावेदारों को मनाने से लेकर प्रत्याशियों की मदद
करने और केंद्रीयं नेताओं की सभाएं उनके क्षेत्रों में करवाने के लिए
विजयवर्गीय ने लगातार संपर्क किया। 66 में से 45 से ज्यादा विधानसभा
क्षेत्रों के प्रत्याशियों से विजयवर्गीर्य और उनकी टीम सतत संपर्क में रही
और उनकी हर संभव मदद भी करती रही। यही कारण रहा कि भाजपा ने इंदौर सहित
आसपास के जिलों में बड़ी जीत का लक्ष्य हासिल कर लिया।

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