देवास कलेक्टर कार्यालय में फर्जी दस्तावेजों के जरिए आदिवासी जमीन की अनुमति देने का बड़ा घोटाला सामने आया है। बाबुओं और दलालों की मिलीभगत से जारी फर्जी आदेशों के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
देवास। कलेक्टर कार्यालय में संगठित फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है, जहां बाबुओं और बाहरी लोगों की मिलीभगत से कलेक्टर की अनुमति के फर्जी आदेश जारी किए जा रहे थे। मामले का खुलासा होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। कलेक्टर ऋतुराज सिंह के निर्देश पर जांच कराई गई, जिसमें पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ। इसके बाद बीएनपी पुलिस ने मामला दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों में एडीएम कार्यालय का रीडर संजीव जाटव, नजूल शाखा का बाबू रमेश लोबानिया, विजयागंज मंडी तहसील का बाबू जितेंद्र भद्रे और खातेगांव क्षेत्र का दलाल महेंद्र कुशवाह शामिल हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने जैसी गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।

ऐसे खुला राज
फर्जीवाड़े का खुलासा उस समय हुआ जब एक व्यक्ति जमीन की रजिस्ट्री कराने जिला पंजीयक कार्यालय पहुंचा। दस्तावेजों की जांच के दौरान कलेक्टर की अनुमति से जुड़े आदेश संदिग्ध पाए गए। इसकी सूचना तत्काल कलेक्टर को दी गई, जिसके बाद जांच शुरू हुई। प्रारंभिक जांच में करीब 13 मामलों में फर्जी अनुमति जारी किए जाने की पुष्टि हुई है।
जांच में सामने आया है कि आदिवासी जमीन के क्रय-विक्रय के लिए आवश्यक कलेक्टर अनुमति प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा था। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों को अवैध लाभ पहुंचाया। पुलिस के अनुसार यह काम संगठित गिरोह के रूप में किया जा रहा था, जिसमें दलाल जरूरतमंद लोगों को बाबुओं से मिलवाता था और फिर फर्जी आदेश तैयार कर दिए जाते थे।
पुलिस का कहना है कि मामले में और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



