भोपाल : 11 दिसंबर , 2023 (प्योरपॉलीटिक्स)
यादव बाहुल्य उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें होने की वजह से केंद्र की सरकार बनाने में इस राज्य की बड़ी भूमिका होती है। यहां ओबीसी वर्ग की जनसंख्या 54 प्रतिशत है। इसमें लगभग 20 प्रतिशत यादव समाज के मतदाता हैं। यही वजह है कि सभी दल यहां यादव समाज के लोगों को साधने की कोशिश करते हैं। समाजवादी पार्टी से भी यादव समाज के लोगों का उत्तर प्रदेश में अच्छा जुड़ाव है। ऐसे में मध्य प्रदेश का पड़ोसी राज्य होने के कारण उत्तर प्रदेश में इसका लाभ पार्टी उठाना चाहती है।
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने यादव समाज से आने वाले माेहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर एक साथ कई निशाने साधे हैं। मध्य प्रदेश ही नहीं यादव बहुल उत्तर प्रदेश और बिहार को भी साध लिया है। इन राज्यों में यादव समाज के लोग बड़ी संख्या में हैं। अगले वर्ष लोकसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 और बिहार में 40 सीटे हैं। बिहार में वर्ष 2025 में विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित हैं। ऐसे में भाजपा संगठन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी ओबीसी वर्ग में भी सभी समाज के लाेगों को आगे लाना चाहती है। बता दें के इसके पहले उमा भारती, बाबूलाल गौर, शिवराज सिंह चौहान भी ओबीसी वर्ग से मुख्यमंत्री थे, पर सभी अलग-अलग समाज से थे। अब बाबूलाल गौर के बाद यादव समाज के किसी नेता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली है।
बिहार की कुल जनसंख्या में 14 प्रतिशत (1.86 करोड़) लोग यादव के समाज के हैं और ओबीसी आबादी 63 प्रतिशत है। पार्टी यहां अगले वर्ष होने वाले लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव में मोहन यादव का उपयोग कर सकती है। इसके अलावा यादव बहुल अन्य राज्यों में कुछ सीमा तक पार्टी को इसका लाभ मिल सकता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने मुख्यमंत्री के रूप में मध्य प्रदेश ही नहीं इसके पहले भी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने चौंकाने वाले नाम दिए हैं। उत्तराखंड में 114 दिन के लिए मुख्यमंत्री रहे तीरथ सिंह रावत, उतराखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और हरियाणा के मुख्यमंत्री बने मनोहर लाल खट्टर भी साधारण कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री बने।



