ओंकारेश्वर | 16 अप्रैल, 2026
आदि गुरु शंकराचार्य की पावन संन्यास भूमि ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर स्थित ‘एकात्म धाम’ में 17 से 21 अप्रैल तक ‘आचार्य शंकर प्रकटोत्सव: एकात्म पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा आयोजित इस पंच दिवसीय समागम में भारत की गौरवशाली संन्यास परंपरा के शीर्ष संतों, विचारकों और विशिष्ट विद्वानों का जमावड़ा होगा।
कार्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार प्रातः 9:30 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और द्वारका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में होगी। इस गरिमामयी अवसर पर मुख्यमंत्री ‘अद्वैत लोक’ एवं ‘अक्षर ब्रह्म’ प्रदर्शनी का लोकार्पण करेंगे और विशेष वैदिक अनुष्ठानों में भी सम्मिलित होंगे।
अद्वैत लोक संग्रहालय: सांस्कृतिक विरासत का नया केंद्र
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में एकात्म धाम के दूसरे चरण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। मई 2025 में कैबिनेट द्वारा स्वीकृत 2195 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाला ‘अद्वैत लोक’ संग्रहालय आदि गुरु के जीवन और उनके अद्वैत दर्शन को आधुनिक तरीके से प्रदर्शित करेगा। इससे पहले प्रथम चरण में आचार्य शंकर की 108 फीट ऊंची भव्य ‘एकात्मता की मूर्ति’ (Statue of Oneness) की स्थापना पहले ही की जा चुकी है, जो वैश्विक आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
अद्वैत और आधुनिकता का संगम
इस महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता इसका समसामयिक विषयों से जुड़ाव है। ‘अद्वैतामृतम् – विमर्श सभा’ के अंतर्गत 17 अप्रैल को ‘अद्वैत एवं Gen-Z’ जैसे विषय पर चर्चा होगी, जिसमें युवाओं के नजरिए से वेदांत की व्याख्या की जाएगी। वहीं 19 अप्रैल का दिन तकनीकी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होगा, जब स्वामी परम शिवानंद और IIT दिल्ली के विशेषज्ञ ‘अद्वैत एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)’ के अंतर्संबंधों और चेतना के विषयों पर संवाद करेंगे। इसके अलावा अद्वैत का पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक शांति और सिख संप्रदाय के ‘एक ओंकार’ के साथ संबंधों पर भी विस्तृत विमर्श आयोजित किया जाएगा।
रसो वै सः: एकात्मता के सांस्कृतिक स्वर
महोत्सव की शाम शास्त्रीय कलाओं के नाम होगी। 17 अप्रैल को जयतीर्थ मेवुंडी के गायन और शुभदा वराडकर की ओड़िसी प्रस्तुति ‘एकम्’ से सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत होगी। आने वाले दिनों में जसलीन कौर की गुरु वाणी, रमा वैद्यनाथन का भरतनाट्यम ‘नमामि देवी’, और हेमंत चौहान की ‘निर्गुण वाणी’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से एकात्मता का संदेश फैलाया जाएगा। महोत्सव के समापन दिवस यानी 21 अप्रैल को नर्मदा तट पर एक विशेष दीक्षा समारोह आयोजित होगा, जिसमें देश-विदेश के 700 से अधिक युवा ‘शंकरदूत’ के रूप में संकल्प लेंगे।
विद्वानों का सम्मान और वैदिक अनुष्ठान
21 अप्रैल को आयोजित ‘शंकरावतरणम्’ मुख्य समारोह में संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, स्वामी अवधेशानंद गिरि और स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर अद्वैत वेदांत के प्रचार-प्रसार में अतुलनीय योगदान देने के लिए स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती और गौतम भाई पटेल को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। संपूर्ण महोत्सव के दौरान ब्रह्मर्षि कुप्प सुब्रमण्यम अवधानी के निर्देशन में चतुर्वेद पारायण, श्रीचक्र नवावरण पूजा और शाङ्करभाष्य का पारायण जैसे पवित्र अनुष्ठान निरंतर जारी रहेंगे।
संपादकीय सारांश: एकात्म धाम न केवल मध्य प्रदेश बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए अद्वैत दर्शन का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। यह आयोजन सनातन धर्म के पुनरुद्धारक आचार्य शंकर के सार्वभौमिक एकता के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।



