सवा दो साल का कार्यकाल पूरा, पर अधर में लटका विस्तार; राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम और आगामी विधानसभा चुनाव बने बड़ी बाधा
साकेत सिंह, भोपाल
मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव सरकार के सवा दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने को है, लेकिन प्रदेश की सियासी गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है—कैबिनेट विस्तार कब? जहाँ पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय नेतृत्व की अनुमति से अपनी टीम में फेरबदल कर लिया है, वहीं मध्य प्रदेश में सन्नाटा पसरा है। आखिर दिल्ली में एमपी को लेकर क्या खिचड़ी पक रही है? क्या मुख्यमंत्री को विस्तार की अनुमति न मिलना किसी बड़े सियासी बदलाव का संकेत है?
संगठन में बदलाव और चुनाव बने रोड़ा
सियासी जानकारों का मानना है कि कैबिनेट विस्तार में देरी की मुख्य वजह भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में हो रहे बदलाव हैं। 20 जनवरी 2026 को कार्यभार संभालने वाले नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन वर्तमान में अपनी नई टीम के गठन में व्यस्त हैं। जब तक राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची फाइनल नहीं होती, तब तक राज्यों में बड़े फेरबदल की संभावना कम है। इसके अलावा, असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों ने भी केंद्रीय नेतृत्व का ध्यान भटका दिया है।
परफॉर्मेंस कार्ड तय करेगा मंत्रियों का भविष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने दो साल के कार्यकाल के दौरान मंत्रियों के कामकाज की विभागवार समीक्षा पूरी कर ली है। सूत्रों की मानें तो मंत्रियों का ‘परफॉर्मेंस कार्ड’ तैयार है।
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स्वतंत्र एजेंसी की रिपोर्ट: केंद्रीय नेतृत्व ने भी स्वतंत्र एजेंसियों के माध्यम से मंत्रियों के कामकाज का फीडबैक लिया है।
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कामकाज से नाराजगी: चर्चा है कि आलाकमान तीन-चार मंत्रियों को छोड़कर बाकी के रिपोर्ट कार्ड से खुश नहीं है। कई विभागों में प्रगति का ग्राफ उम्मीद से काफी नीचे रहा है।
कैबिनेट का गणित: 4 खाली सीटें, पर 6 नए चेहरों की तैयारी
वर्तमान में मोहन कैबिनेट में मंत्रियों की कुल क्षमता 35 है, जिनमें से अभी केवल 31 मंत्री पद पर हैं। यानी 4 पद तकनीकी रूप से खाली हैं। लेकिन खबर यह है कि विस्तार सिर्फ खाली पदों को भरने तक सीमित नहीं रहेगा।
“कम से कम चार मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है। खराब प्रदर्शन के आधार पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। ऐसे में करीब 6 नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल कर क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधे जा सकते हैं।” – पार्टी सूत्र
क्या एमपी में होने वाला है कोई ‘बड़ा फेरबदल’?
छत्तीसगढ़ में हुए बदलावों के बाद एमपी में बढ़ती देरी ने ‘बड़े फेरबदल’ की अटकलों को हवा दे दी है। क्या यह सिर्फ एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है या इसके पीछे नेतृत्व में किसी बड़े संगठनात्मक सर्जरी की तैयारी है? फिलहाल, सबकी नजरें दिल्ली और नितिन नवीन की नई टीम की घोषणा पर टिकी हैं।



