नारी शक्ति का अपमान- नहीं सहेगा हिंदुस्तान

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कांग्रेस और इंडी गठबंधन का असली चेहरा बेनकाब!, भाजपा के साथ महिलाओं का आक्रोश मार्च

भोपाल। सोमवार, 20 अप्रैल 2026

देश की महिलाओं को धोखा देने वालों का अंत करीब है! कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले विधेयक को संसद में गिराकर पूरे देश की करोड़ों माताओं-बहनों की पीठ में छुरा घोंपा है। उनकी ‘नारी-विरोधी’ मानसिकता एक बार फिर दुनिया के सामने है। ये सिर्फ एक विधेयक ही नहीं था, बल्कि नारी शक्ति का सम्मान था, जिसका गला पूरे विपक्ष ने मिलकर घोंटा है।

अपमान के विरोध में और महिलाओं के सम्मान में भाजपा का संघर्ष सदन से अब सड़क पर उतर आया है। मध्य प्रदेश की नारी शक्ति के आक्रोश मार्च में हर कदम पर मातृशक्ति के साथ है भाजपा। प्रदेश भाजपा कार्यालय से एमवीएम मैदान तक हमारी माताओं-बहनों के इस मार्च का नेतृत्व हमारे भैया और लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और स्वयं मातृशक्ति कर रही हैं।

हर गांव, हर गली और हर मोहल्ले तक पहुंचेगी आक्रोश रैली और बताया जाएगा कि आपकी बेटियों का रास्ता विपक्ष ने कैसे रोका है। कांग्रेस और इंडी गठबंधन अब आक्रोश मार्च की आंच से आने वाले चुनावों में भी नहीं बच सकेंगे। उनकी बदनीयती उजागर करने के लिए विधानसभा से लेकर नगरीय निकाय से भी कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित होंगे। पूछा जाता रहेगा कि 2029 में महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% सीट मिलने में उन्होंने अड़ंगा क्यों लगाया?

विपक्ष का दोहरा चरित्र इस अधिनियम से आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी नारी शक्ति की 75 करोड़ आबादी को उनका अधिकार देना चाहते थे, लेकिन महिलाओं को 33% आरक्षण सुनिश्चित करने वाले नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम को संसद में गिराकर कांग्रेस ने अपना नारी विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है। सदन में महिला आरक्षण की सीधी मुखालफत के बजाय खिलाफ सबने ‘हम समर्थन करते हैं’ कहा, लेकिन कुटिलता देखिए कि ‘मगर’, ‘परंतु’, ‘किंतु’ लगाकर साफ-साफ विरोध कर दिया।

उत्तर-दक्षिण के नाम पर झूठ और साजिश राहुल हों या अखिलेश, ये महिला विरोधी मानसिकता में झूठ फैला रहे हैं कि दक्षिण का नुकसान होगा, जबकि कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल की 139 सीटें 50% बढ़ोतरी के बाद 195 हो जाएंगी। दक्षिण भारत में सीटों का आंकड़ा 23.76% से 23.87% होगा, यानी जस का तस। फिर भी देश तोड़ने की साजिश, उत्तर-दक्षिण का नारा! उन्हें संविधान पर भरोसा नहीं, जिससे लक्षद्वीप का भी उतना ही अधिकार है जितना उत्तर प्रदेश और बिहार का।

‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा देने वालों की चुप्पी और वो कहां मुंह छिपाकर बैठीं हैं, जो ‘मैं लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नारा देकर अब मां- बहन की पीठ में खंजर घोंप रही हैं। सोनिया गांधी और प्रियंका इसका जवाब दें। पूरा देश जानता है कि कांग्रेस ने नारी शक्ति का हमेशा वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल किया, केवल उपभाेग की वस्तु समझा। उसके नेताओं ने नारी का अपमान किया, तंदूर में भूनकर मार डाला। जब आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने नारी को सम्मान दिलाना चाहा तो कांग्रेस की पुरूषवादी मानसिकता सामने आ गई। कांग्रेस ने अपने 70 वर्ष के शासन में महिला आरक्षण का झुनझुना बजाया और जब संसद में आखिरी बाजी आई, तो आधी आबादी के सपने चकनाचूर कर दिए।

नारी सम्मान: भाजपा का संकल्प दूसरी तरफ भाजपा ने वंचित वर्ग की महिला को देश का प्रथम नागरिक बनाया, वहीं 14 लाख महिलाएं पंचायत में काम कर चुकी हैं। भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी नारी को देश नीति निर्धारक बनाना चाहते थे, लेकिन मातृशक्ति अब कांग्रेस के खिलाफ संसद से सड़क तक हुंकार भर रही है। ये आक्रोश मार्च मात्र विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि कांग्रेस की अंत्येष्टी की तैयारी है।

माताओं-बहनों… ये लोग सदन में शोर मचा लेंगे… लेकिन चुनाव में आपका आक्रोश सहन नहीं कर पाएंगे! रास्ता नहीं मिलेगा… हिसाब चुकाना पड़ेगा

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