भोपाल : 24 जनवरी, 2024 (प्योरपॉलीटिक्स)

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित हनी ट्रैप मामले को पांच वर्ष हो गए हैं। कई जांच अधिकारी बदल गए लेकिन उन चेहरों का खुलासा नहीं हुआ, जो इस हनी ट्रैप मामले में सुर्खयों में रहे हैं। दरअसल, मध्य प्रदेश के कई बड़े नौकरशाह ऐसे हैं, जो इस हनी ट्रैप मामले में फंसे हुए हैं। स्वयं को बचाने के लिए इन नौकरशाहों ने हनी ट्रैप का शिकार बनाने वाली महिलाओं को करोड़ों रुपये दिया है। कहा जाता है कि इन महिलाओं से बरामद वीडियो में उन नौकरशाहों के फूटेज दर्ज भी हैं। सबसे पहले कमल नाथ सरकार ने वर्ष 2019 में इस मामले की जांच के लिए एसआइटी गठित कर पहले डी श्रीनिवास वर्मा और फिर तेजतर्राट आइपीएस संजीव शमी को सौंपी थी। शमी ने जांच तेज की तो उन्हें हटा दिया गया। बाद में राजेंद्र कुमार ने इस जांच को आगे बढ़ाया और अपनी सेवानिवृत्ति से पहले अगस्त 2020 में अदालत को 40 ऐसे शौकीन लोगों की जांच रिपोर्ट सौंपी थी, जिन्होंने हनी ट्रैप मामले में महिलाओं के साथ रातें बिताई और उनके कैमरे में कैद हो गए। इनमें कुछ पूर्व मंत्री और बड़े राजनेताओं सहित दो एडीशनल चीफ सेक्रेट्री के नाम शामिल बताए गए हैं। आपको याद दिला दें कि इस मामले की पोल भी नगर निगम इंदौर में पदस्थ एक अधीक्षण यंत्री ने खोली थी। इस रसूखदार इंजीनियर हरभजन सिंह से महिलाएं करोड़ों रुपये लेने के बाद और रुपये मांग रही थी।
अब सवाल उठता है कि इस हनी ट्रैप मामले में शामिल सफेदपोश लोगों के चेहरे सरकार क्यों छिपा रही है। वह भी तब, जब उसमें अधिकांश ब्यूरोक्रेट्स शामिल हैं। विचार करना चाहिए कि इन अधिकारियों ने कहां से करोड़ों रुपये कमाया और अय्याशी पर खर्च किया। इस मामले की एक आरोपी महिला तो आईएएस अधिकारियों के अरेरा क्लब की मेम्बर भी थी और एक मुख्यसचिव ने उसे अरेरा क्लब जैसे प्रतिष्ठित संस्था में शिकार फसाने का लायसेंस दिया था। अंदाज लगाया जा सकता है कि मध्य प्रदेश में नौकरशाही की असलीयत क्या है। इससे आगे बढ़कर इन महिलाओं ने महिला एवं बाल विकास विभाग के दो अधिकारियों पर जबरिया संबंध बनाने यानी दुष्कृत्य का आरोप लगाया था लेकिन अफसरों पर मेहरबान उस सरकार ने उन दागियों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की। इनमें से एक मंत्री का विशेष सहायक था। अब एकबार फिर मामला चर्चा में इसलिए आया क्योंकि प्रदेश के बहुचर्चित हनी ट्रेप मामले की जांच के लिए बने विशेष जांच दल (एसआइटी) का प्रमुख अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) आदर्श कटियार काे बनाया गया है। इसके पहले एसआइटी प्रमुख विपिन माहेश्वरी के सेवानिवृत होने के बाद आदर्श कटियार को यह जिम्मेदारी दी गई है। पर अब भी सवाल वही है कि राज्य सरकार ऐसे भ्रष्ट चरित्र के नौकरशाहों की इतनी हमदर्द क्यों बनी हुई है। मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अब डा मोहन यादव प्रदेश की कमान संभाल रहे हैं इसलिए एकबार फिर उम्मीद जगी है कि ऐसे घृणित कृत्यों में शामिल सफेदपोश लोगों के नाम सामने आएंगे। यादव जी, आपको चौकाने वाली बात बता दें कि राज्य सरकार की एसआइटी ने ही अदालत से प्रार्थना की है कि इस मामले की सुनवाई बंद कमरे में की जाए। बताइए कि एसआइटी ऐसे चरित्रहीन लोगों की बदनामी को क्यों रोकना चाहती है। एसआइटी ने मई 2023 में यह भी कहा था कि सीडी में सारे फूटेज अंतरंग हैं इसलिए इसे देखने के लिए दोनों पक्षों के वकीलों के अलावा कोई और न हो। ठीक है ऐसे अश्लील दूश्य सार्वजनिक रूप से नहीं देखे जाना चाहिए लेकिन फिर सवाल वहीं का वहीं है कि ऐसे दुष्चरित्रों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई।



